क्या ईरान के खिलाफ ट्रंप की सैन्य रणनीति चुनावी राजनीति को प्रभावित करेगी?
अमेरिकी राजनीति में उथल-पुथल
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका की राजनीतिक स्थिति भी गर्म होती जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अरब सागर में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम राजनीतिक दृष्टि से सही है।
सैन्य कार्रवाई पर असहमति
व्हाइट हाउस के अंदर ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर एकजुटता की कमी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय मतदाता महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में यदि सरकार का ध्यान विदेशी तनाव पर अधिक केंद्रित होता है, तो यह चुनावी दृष्टिकोण से जोखिम भरा हो सकता है।
रिपब्लिकन की रणनीति
व्हाइट हाउस का बचाव
हाल की एक बैठक में रिपब्लिकन रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया कि पार्टी को चुनाव में अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सैन्य संघर्ष पार्टी के लिए हानिकारक हो सकता है। ट्रंप की राजनीति अब तक विदेशी युद्धों से दूरी और 'फॉरएवर वॉर्स' समाप्त करने के वादे पर आधारित रही है। हालांकि, कुछ अधिकारी इस नीति का समर्थन कर रहे हैं, यह कहते हुए कि राष्ट्रपति की विदेश नीति 'अमेरिका फर्स्ट' सिद्धांत पर आधारित है।
ईरान को चेतावनी
ईरान को लगातार चेतावनी
ट्रंप ने हाल ही में फिर से कहा कि ईरान को 'न्यायसंगत समझौता' करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने या यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन का कहना है कि कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन समय पर समाधान आवश्यक है।
चुनावी प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय छवि
चुनावी असर और अंतरराष्ट्रीय छवि
रिपोर्टों के अनुसार, महंगाई और आर्थिक मुद्दे अमेरिकी मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। इतिहास बताता है कि मिडटर्म चुनावों में विदेश नीति अक्सर निर्णायक मुद्दा नहीं बनती। लेकिन यदि भारी सैन्य तैनाती के बाद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर पड़ने का खतरा है।
