क्या चीन ने ईरान-अमेरिका संघर्ष में निभाई मध्यस्थ की भूमिका?
संघर्ष के बीच चीन की भूमिका पर चर्चा
पश्चिम एशिया में पिछले 38 दिनों से चल रहे गंभीर संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के बीच एक नया खुलासा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि ईरान को बातचीत के लिए लाने में चीन की भूमिका हो सकती है। एएफपी के साथ बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन युद्धविराम में शामिल था, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा सुना है, जिससे बीजिंग की भूमिका पर चर्चा बढ़ गई है।
चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
हालांकि, चीन ने इस मामले में अपनी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उसने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बताया गया है कि चीन ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए और दोनों देशों को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। चीन, ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और इस संघर्ष को जल्दी समाप्त करने में उसकी रुचि है।
मध्यस्थता में चीन का सहयोग
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ मिलकर मध्यस्थता की। इन देशों के माध्यम से ईरान पर बातचीत के लिए दबाव डाला गया और शांति की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। वार्ता के दौरान चीनी अधिकारी लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में रहे, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।
चीन की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता
इस घटनाक्रम को चीन की वैश्विक स्तर पर बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में, चीन ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास किया है। यह मामला उसी दिशा में एक और उदाहरण है। हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन पहले कहा गया था कि बीजिंग शांति स्थापित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
आगे की प्रक्रिया
इस अस्थायी युद्धविराम के बाद आगे की प्रक्रिया भी तय की जा रही है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता होने की संभावना है, जिसमें समझौते की शर्तों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा है कि बातचीत जारी है, लेकिन आधिकारिक घोषणा से पहले कुछ भी तय मानना जल्दबाजी होगी।
इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से जहाजों के लिए खोल दिया गया है। युद्धविराम के दौरान ईरान, ओमान के सहयोग से यहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलेगा, जिसका उपयोग युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण में किया जाएगा। इस मार्ग पर आवाजाही का संचालन ईरानी सेना की निगरानी में किया जाएगा।
