क्या पाकिस्तान अपने ही रक्षा समझौते में उलझ गया है? जानें सऊदी अरब के साथ संबंधों की सच्चाई
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब क्षेत्र के अन्य देशों पर भी पड़ता दिख रहा है। इस संदर्भ में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते (SMDA) पर नई बहस छिड़ गई है। इस समझौते के अनुसार, यदि एक देश पर हमला होता है, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। लेकिन ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों और रिफाइनरियों को ड्रोन और मिसाइल हमलों का निशाना बनाया है, फिर भी पाकिस्तान ने किसी भी प्रकार की सैन्य प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे यह धारणा बन रही है कि इस्लामाबाद समझौते की शर्तों का पालन करने में हिचकिचा रहा है।
रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) क्या है?
सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच SMDA पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में कहा गया था कि किसी एक देश पर आक्रमण को दोनों पर आक्रमण माना जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो दोनों देश मिलकर उसका जवाब देंगे। उदाहरण के लिए, यदि भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो इसे सऊदी अरब पर भी हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को प्रतिक्रिया देने का अधिकार होगा।
ईरान के हमले और पाकिस्तान की स्थिति
ईरान लगातार सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बना रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए रिफाइनरियों को भी टारगेट किया गया है। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने समझौते को लागू करने की दिशा में कोई ठोस सैन्य कदम नहीं उठाया है।
हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन हमलों की निंदा की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता दिखाई, लेकिन उन्होंने न तो किसी सैन्य सहायता की घोषणा की और न ही ईरान के खिलाफ किसी प्रतिक्रिया का संकेत दिया।
क्या पाकिस्तान अपने ही समझौते में उलझा?
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में पाकिस्तान अपने ही बनाए रणनीतिक ढांचे में फंसा हुआ है। एक ओर उसने रक्षा समझौते के तहत प्रतिबद्धता दिखाई है, वहीं दूसरी ओर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है। इससे उसकी नीतिगत स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
इसहाक डार का बयान
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने मंगलवार को कहा कि युद्ध के प्रारंभ में वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि संघर्ष की शुरुआत के समय वह इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक के लिए सऊदी अरब में थे और उन्होंने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की।
डार ने कहा, 'मैंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि सऊदी अरब के साथ हमारा पारस्परिक रक्षा समझौता है। उन्होंने मुझसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की धरती का इस्तेमाल हमारे खिलाफ न किया जाए।'
उन्होंने यह भी कहा कि 'सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव न के बराबर रहा है।' डार ने यह दावा किया कि पाकिस्तान इस युद्ध को समाप्त कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से उन्होंने कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है।
