क्या पाकिस्तान के नेताओं को मिलेगा नोबेल शांति पुरस्कार? ट्रंप का बड़ा ऐलान
ट्रंप का ईरान पर हमले का 15 दिन का विराम
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमले को 15 दिनों के लिए रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अपील पर उठाया गया है। ट्रंप ने यह भी बताया कि चीन की सहायता से ईरान को वार्ता की मेज पर लाने में मदद मिली है।
सीजफायर की शर्तें और पाकिस्तान की भूमिका
यह सीजफायर दोनों पक्षों के लिए था, लेकिन इसमें ईरान को हार्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने की शर्त रखी गई है। पाकिस्तान ने दोनों देशों को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
पाकिस्तानी मीडिया में उत्साह
हालांकि सीजफायर की स्थिति अभी भी कमजोर और अनिश्चित है, फिर भी पाकिस्तानी मीडिया में खुशी का माहौल है। टीवी चैनलों पर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को कूटनीति के नायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। एक प्रमुख चैनल पर चर्चा में पैनलिस्टों ने इसे पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया।
एक पैनलिस्ट ने तो यह तक कह दिया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे योग्य उम्मीदवार हैं, यह कहते हुए कि ये दोनों लोग विश्व शांति के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
नोबेल पुरस्कार की मांग
पैनलिस्ट ने आगे कहा कि सभी वैश्विक नेताओं को चाहिए कि वे शहबाज और मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करें। कुछ व्यापार संगठनों ने भी इस मांग को दोहराया है। पाकिस्तानी मीडिया इसे देश की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मान रहा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है।
सीजफायर केवल 15 दिनों के लिए है और इसका भविष्य अभी भी अनिश्चित है। ट्रंप ने पहले ही कहा है कि अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह से तैयार हैं। सीजफायर के अगले दिन उन्होंने एक सख्त चेतावनी भी दी।
बातचीत की अनिश्चितता
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुक्रवार को पाकिस्तान में होने वाली है, लेकिन इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप अमेरिका में भी इस निर्णय को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान अपनी भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जबकि यह कहना मुश्किल है कि सीजफायर कितने समय तक टिकेगा।
युद्ध की आशंका पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। फिलहाल पाकिस्तानी टीवी पर नोबेल पुरस्कार की चर्चा जोरों पर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मांग को लेकर कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं आई है।
