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क्या पाकिस्तान बन सकता है अमेरिका-ईरान वार्ता का मध्यस्थ? जानें विशेषज्ञों की राय

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें एक नए विवाद में उलझ गई हैं, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। माइकल रुबिन जैसे विश्लेषकों ने पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड और उसके रुख पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका कार्रवाई कर सकता है। क्या पाकिस्तान इस भूमिका के लिए सही है? जानें पूरी कहानी।
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क्या पाकिस्तान बन सकता है अमेरिका-ईरान वार्ता का मध्यस्थ? जानें विशेषज्ञों की राय

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें एक नए विवाद में उलझ गई हैं। इस बार पाकिस्तान, जो इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की योजना बना रहा है, चर्चा का केंद्र बन गया है। कुछ लोग इसे कूटनीतिक पहल मानते हैं, जबकि अन्य इसे गंभीर जोखिम के रूप में देख रहे हैं। इस पर अमेरिका के एक प्रमुख विश्लेषक ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे बहस और बढ़ गई है।


विश्लेषक की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी थिंक टैंक अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह भूमिका अमेरिका के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती है और सुरक्षा संबंधी खतरे भी उत्पन्न कर सकती है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर का आयोजन करने की तैयारी कर रहा है।


पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल

रुबिन ने संडे गार्जियन में प्रकाशित अपने लेख में पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नीतियां हमेशा विवादास्पद रही हैं। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम में मदद करने के आरोप लगे थे। ऐसे में उनका कहना है कि अब उसी देश को मध्यस्थ बनाना उचित नहीं है।


अमेरिकी कार्रवाई पर पाकिस्तान का रुख

रुबिन ने उस समय का भी जिक्र किया जब अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तान सरकार ने इस ऑपरेशन पर नाराजगी जताई थी। उनका मानना है कि व्यक्तिगत रिश्तों के आधार पर किसी देश पर भरोसा करना सही नहीं है, क्योंकि इससे भविष्य में बड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


ट्रंप के फैसले पर आलोचना

रुबिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को भी गलत बताया। उनका कहना है कि पाकिस्तान पर भरोसा करना पुरानी गलतियों को दोहराने जैसा है, जो पहले अफगानिस्तान, गाजा, सीरिया और यमन में हो चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपने विरोधियों को बातचीत की जिम्मेदारी सौंपता है, तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।


भारत का संदर्भ

अपने लेख में रुबिन ने भारत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को सतर्क रहना चाहिए और यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान इस भूमिका तक कैसे पहुंचा। उनका मानना है कि अगर किसी देश को मध्यस्थ बनाना था, तो भारत इस भूमिका के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता था।


ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव

इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत के दूसरे दौर के लिए पाकिस्तान जाएंगे। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका उसके नागरिक ढांचे पर हमला कर सकता है। हालांकि, खबरें हैं कि ईरान ने इस वार्ता में शामिल होने से मना कर दिया है, जिससे बातचीत की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है।