क्या बांग्लादेश में पाकिस्तान का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए खतरा है?
पाकिस्तान का रणनीतिक अलगाव समाप्त करने का प्रयास
कई लोग वर्ष 2025 को पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मानते हैं, जब लंबे समय से चल रहा रणनीतिक अलगाव समाप्त होने की संभावना है। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में आया बदलाव, सऊदी अरब के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग, और पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका।
बांग्लादेश में पाकिस्तान की रुचि
पाकिस्तान की सेना और सरकार ने एक सुनियोजित तरीके से यह संदेश फैलाने की कोशिश की है कि उन्होंने मई 2025 में भारत के सामने मजबूती से नेतृत्व किया। इसी आधार पर पाकिस्तान बांग्लादेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में जुलाई 2024 में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद नए समीकरणों के संकेत मिलने लगे थे। लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना के कार्यकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते ठंडे रहे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद संबंध सुधारने के अवसर उत्पन्न हुए।
भारत की चिंताएँ
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं बांग्लादेश फिर से पूर्वी पाकिस्तान जैसी स्थिति की ओर न बढ़ जाए। 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक घटनाक्रम ने 1975 के उथल-पुथल भरे दौर की यादें ताजा कर दीं। शेख हसीना का लंबा शासन भारत-बांग्लादेश रिश्तों में स्थिरता का प्रतीक था।
यदि बांग्लादेश के साथ संबंध बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर पड़ेगा। बांग्लादेश के साथ सीमा केवल एक रेखा नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा से जुड़ी जटिलताओं से भरी हुई है।
बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति
बांग्लादेश में 1947 और 1971 की सोच के बीच गहरा टकराव है। धार्मिक पहचान की राजनीति और भाषाई-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच संघर्ष चल रहा है। हाल के दिनों में अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनीतिक बयानों ने भारत में जनमत को प्रभावित किया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होना एक सकारात्मक संकेत है। ऐसे संवाद और संपर्क आगे भी जारी रहने चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
