क्या यूरोप बिना अमेरिका के अपनी सुरक्षा को मजबूत कर सकता है?
ट्रंप के टैरिफ से ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव
नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के कई सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जिससे ट्रांस-अटलांटिक संबंधों पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रीनलैंड के संदर्भ में अपनी रणनीति के तहत, ट्रंप ने नाटो के आठ यूरोपीय सदस्यों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका दशकों से डेनमार्क समेत पूरे यूरोप की सुरक्षा का ध्यान रखता आया है, बिना किसी प्रत्यक्ष लागत के। अब, उनके अनुसार, “कर्ज चुकाने का समय आ गया है.”
अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में भूमिका
सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की भूमिका
यूरोप की सामूहिक सुरक्षा का आधार नाटो है, जिसकी असली ताकत अमेरिका से आती है। संगठन की कुल सैन्य क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत अमेरिका द्वारा प्रदान किया जाता है। आधुनिक युद्ध के लिए आवश्यक क्षमताएं, जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम, सैटेलाइट आधारित इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और वैश्विक लॉजिस्टिक्स, में अमेरिका यूरोप से कहीं आगे है।
परमाणु सुरक्षा और सैन्य तकनीक में निर्भरता
परमाणु सुरक्षा भी US, ब्रिटेन और फ्रांस पर निर्भर
यूरोप की परमाणु सुरक्षा मुख्य रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर निर्भर है। रूस जैसे सैन्य रूप से मजबूत देश के सामने, यूरोपीय देशों की सामूहिक तैयारी सीमित है। यदि अमेरिका नाटो में अपनी भूमिका कम करता है, तो यह संगठन केवल एक औपचारिक मंच बनकर रह जाएगा।
यूरोप की सैन्य ताकत और आर्थिक असंतुलन
हथियार और आधुनिक सैन्य तकनीक में निर्भरता
यूरोप के पास सैनिकों की संख्या और पारंपरिक हथियारों की कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक युद्ध केवल संख्या से नहीं जीते जाते। एयर डॉमिनेंस, ड्रोन वॉरफेयर, लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम और ग्लोबल मिलिट्री सप्लाई नेटवर्क में यूरोप अभी भी अमेरिका पर निर्भर है।
आर्थिक ताकत का असंतुलन
आर्थिक दृष्टि से अमेरिका और यूरोप के बीच बड़ा अंतर है। 2025 के अनुमान के अनुसार, यूरोप की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। यह अंतर वैश्विक प्रभाव और निर्णय लेने की क्षमता में भी स्पष्ट है।
ऊर्जा नीति में बदलाव और आत्मनिर्भरता की चुनौती
ऊर्जा और सप्लाई चेन में बढ़ती अमेरिकी भूमिका
रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद, यूरोप की ऊर्जा नीति में बदलाव आया है। आज, यूरोप विशेष रूप से लिक्विफाइड नेचुरल गैस के मामले में अमेरिका पर निर्भर है। जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड और इटली जैसे देशों ने नए एलएनजी टर्मिनल बनाए हैं, जिनसे अमेरिकी गैस का आयात हो रहा है।
क्या यूरोप आत्मनिर्भर बन सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करना संभव है, लेकिन यह एक कठिन और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए यूरोप को एक संयुक्त यूरोपीय सेना की दिशा में कदम उठाने होंगे और अपने रक्षा उद्योग में निवेश करना होगा।
