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क्या है Netanyahu का नया Hexagon of Alliances? जानें Modi के इजराइल दौरे से पहले का महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे से पहले, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 'हेक्सागन ऑफ एलायंसेज' नामक एक नया भू-राजनीतिक गठबंधन प्रस्तावित किया है। इस गठबंधन में भारत, इजराइल, ग्रीस और साइप्रस शामिल हैं, जिसका उद्देश्य पश्चिमी एशिया में उग्रवाद का मुकाबला करना है। नेतन्याहू ने कहा कि अन्य देश भी इस ढांचे में शामिल हो सकते हैं। जानें इस गठबंधन का महत्व और मोदी के इजराइल दौरे की तैयारी के बारे में।
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क्या है Netanyahu का नया Hexagon of Alliances? जानें Modi के इजराइल दौरे से पहले का महत्व

नई भू-राजनीतिक पहल


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे से पहले, यरुशलम से एक नई भू-राजनीतिक गठबंधन की पेशकश आई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 'हेक्सागन ऑफ एलायंसेज' नामक एक नया ब्लॉक प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी एशिया में उग्रवादी धुरियों का मुकाबला करना है। इस गठबंधन में भारत को एक प्रमुख भागीदार के रूप में शामिल किया गया है, साथ ही इजराइल, ग्रीस और साइप्रस भी इसमें शामिल हैं।


नेतन्याहू का बयान

नेतन्याहू ने कहा कि अन्य अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश भी इस ढांचे का हिस्सा बन सकते हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, और सऊदी अरब-पाकिस्तान ने नाटो जैसे रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें तुर्की भी शामिल हो सकता है। मोदी 25-26 फरवरी को नेतन्याहू के निमंत्रण पर इजराइल का दौरा करेंगे, जो उनका दूसरा दौरा होगा। इस दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


हेक्सागन ऑफ एलायंसेज का विवरण

22 फरवरी को सरकारी कैबिनेट मीटिंग में नेतन्याहू ने इस नई अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय देश (जैसे ग्रीस और साइप्रस) और एशिया के कुछ अन्य देश शामिल होंगे। उनका उद्देश्य कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ एकजुट होना है, चाहे वे कट्टरपंथी शिया हों या उभरते हुए कट्टरपंथी सुन्नी गुट। नेतन्याहू ने कहा कि इस सहयोग से सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।


गठबंधन का महत्व

नेतन्याहू का हेक्सागन ऑफ एलायंसेज का आह्वान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिमी और दक्षिणी एशिया में हो रहे बदलाव को औपचारिक रूप देता है। पहले भारत-यूएई-इजराइल-ग्रीस जैसे समझ के बारे में चर्चा होती थी, लेकिन अब यह एक सार्वजनिक रूप से घोषित रणनीतिक सिद्धांत बन गया है। नेतन्याहू ने विरोधियों का नाम लेते हुए इसके इरादे को स्पष्ट किया। यह प्रस्ताव सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के बाद आया है, जिसे विश्लेषक इस्लामिक नाटो कहते हैं।