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क्या है खालिदा जिया के अंतिम संस्कार पर भारत-पाकिस्तान के बीच का विवाद?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के स्पीकर अयाज सादिक के बीच हाथ मिलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया, जबकि भारत ने इसे केवल एक औपचारिक शिष्टाचार बताया। जानें इस घटना के पीछे की सच्चाई और दोनों देशों के बीच की कूटनीतिक स्थिति के बारे में।
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क्या है खालिदा जिया के अंतिम संस्कार पर भारत-पाकिस्तान के बीच का विवाद?

पाकिस्तान ने एक साधारण हाथ मिलाने को बनाया बड़ा मुद्दा


बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के अवसर पर एक साधारण घटना को पाकिस्तान ने एक बड़ा कूटनीतिक मुद्दा बना दिया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक से हाथ मिलाया, जिसे पाकिस्तान ने अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया। भारत ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह केवल एक शिष्टाचार था और इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है।


घटना का विवरण

ढाका में खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए कई देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते समय जयशंकर और अयाज सादिक की मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। यह मुलाकात पूरी तरह से औपचारिक थी और कुछ ही क्षणों में समाप्त हो गई।


पाकिस्तान का बयान

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सचिवालय ने इस मुलाकात को 'महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्क' बताते हुए एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि यह भारत की ओर से मई 2025 के बाद की पहली बड़ी पहल है। पाकिस्तान ने इसे एक अवसर मानते हुए बातचीत और सहयोग के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की और पहलगाम हमले की संयुक्त जांच का पुराना प्रस्ताव भी दोहराया।


भारत का स्पष्ट और सख्त जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय और अन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार की थी और इसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। भारत ने कहा कि शोक के अवसर पर सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया।


पाकिस्तान की दोहरी नीति पर तंज

अधिकारियों ने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान विदेश में शांति और बातचीत की बात करता है, जबकि अपने देश में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। भारत का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता, तब तक किसी महत्वपूर्ण वार्ता की संभावना नहीं है।


अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की स्थिति

पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया उसकी मौजूदा कूटनीतिक हताशा को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह अकेला पड़ता जा रहा है, और भारत के साथ संबंध सुधारने की उसकी कोशिशें बार-बार विफल हो रही हैं। ऐसे में एक साधारण हाथ मिलाने को भी वह बड़ा मुद्दा बनाकर प्रचारित कर रहा है ताकि घरेलू स्तर पर कुछ उपलब्धि दिखा सके।


विश्लेषकों की राय

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान जानबूझकर ऐसे छोटे मौकों का उपयोग भारत को बातचीत के लिए दबाव में लाने की कोशिश करता है। लेकिन भारत ने हर बार स्पष्ट किया है कि उसकी शर्तें नहीं बदलेंगी। आतंकवाद-मुक्त वातावरण ही बातचीत की आधारशिला हो सकती है।