क्या है पीएम मोदी की 'कारपूल कूटनीति' और इसके पीछे का राज़?
भारत की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों का महत्व
नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति में केवल औपचारिक बयान और समझौते ही रिश्तों की गहराई नहीं दर्शाते, बल्कि नेताओं का व्यवहार और आपसी संबंध भी महत्वपूर्ण होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में कई बार ऐसे संकेत दिए हैं, जो भारत और अन्य देशों के बीच संबंधों की मजबूती को दर्शाते हैं। कभी किसी विदेशी नेता को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित करना, तो कभी किसी राष्ट्राध्यक्ष के साथ सहजता से यात्रा करना, मोदी की कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों की झलक मिलती है।
पीएम मोदी के विशेष संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी अपने विशेष संबोधनों के लिए लंबे समय से चर्चा में हैं। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को कई बार 'मेरे भाई' कहा, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन को 'मेरा प्रिय मित्र' कहकर संबोधित किया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जहां औपचारिकता अधिक होती है, वहां इस तरह की आत्मीयता भारत के मजबूत रिश्तों को एक अलग पहचान देती है।
हाल के समय में मोदी ने एक नई शैली अपनाई है, जिसे 'कारपूल कूटनीति' कहा जा रहा है। इसमें वह चुनिंदा विदेशी नेताओं के साथ एक ही वाहन में यात्रा करते हैं। यह दृश्य केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं होते, बल्कि नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और सहजता का संकेत भी देते हैं।
ओबामा के साथ कार यात्रा
इसकी शुरुआत 2014 में हुई थी, जब मोदी ने अमेरिका दौरे के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक ही कार में यात्रा की थी। उस समय यह तस्वीर काफी चर्चित रही थी। बाद में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सफर के दौरान मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की लिमोजिन 'द बीस्ट' उनके गुजरात स्थित माता-पिता के घर जितनी बड़ी है।
इसके बाद 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कारपूलिंग ने सुर्खियां बटोरीं। दोनों नेता बैठक स्थल तक एक ही गाड़ी में पहुंचे थे। बाद में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों साथ नजर आए।
Delighted to welcome my friend, President Putin to India. Looking forward to our interactions later this evening and tomorrow. India-Russia friendship is a time tested one that has greatly benefitted our people.@KremlinRussia_E pic.twitter.com/L7IORzRfV9
— Narendra Modi (@narendramodi) December 4, 2025
कीर स्टार्मर के साथ पीएम मोदी का साझा सफर
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ मुंबई में मोदी का साझा सफर भी काफी चर्चित रहा। वहीं जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने अम्मान यात्रा के दौरान खुद कार चलाकर मोदी को अपने साथ ले जाकर खास सम्मान दिया।
India-UK friendship is on the move and is filled with great vigour!
— Narendra Modi (@narendramodi) October 9, 2025
A picture from earlier today, when my friend PM Starmer and I began our journey to attend the Global Fintech Fest.@Keir_Starmer pic.twitter.com/3FyVFo69Rp
अन्य देशों के नेताओं के साथ मोदी की कारपूलिंग
इथियोपिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री अबी अहमद ने खुद मोदी को होटल तक छोड़ा और उन्हें शहर के कई महत्वपूर्ण स्थान भी दिखाए। फ्रांस यात्रा के दौरान मोदी और मैक्रॉन की दोस्ताना केमिस्ट्री भी खुलकर सामने आई, जब दोनों एक साथ कार में सफर करते नजर आए।
Dosti &diplomacy
— pallavi ghosh (@_pallavighosh) December 17, 2025
PM Abiy Ahmed of Ethiopia again drove PM in his car to the airport and personally bid farewell to PM Modi as he emplaned for Oman pic.twitter.com/Sj2OZAFhvX
इसके अलावा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ भी मोदी की कारपूलिंग चर्चा का विषय बनी। इन तस्वीरों और मुलाकातों ने यह संकेत दिया कि भारत की विदेश नीति अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास और मजबूत रिश्तों पर भी आधारित है।
