खाड़ी में युद्ध: ईरान की आक्रामकता और अमेरिका की अनिश्चितता
खाड़ी में युद्ध की स्थिति
खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष अपने चरम पर पहुंच चुका है। आसमान में मिसाइलों की गूंज, ड्रोन की आवाज़ें और जलते हुए शहरों के बीच एक नई तस्वीर उभरकर सामने आई है। ईरान की प्रमुख सैन्य इकाई आईआरजीसी के एयररोस्पेस प्रमुख मेजर जनरल माजिद मौसमी, जिनके बारे में पहले यह खबरें थीं कि वे गायब हो गए हैं या इजरायली हमलों में मारे गए हैं, अब युद्ध के मैदान में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। ईरानी राज्य मीडिया द्वारा जारी एक वीडियो में मौसमी को अंडरग्राउंड मिसाइल बेस का दौरा करते हुए और सैनिकों से बातचीत करते हुए देखा गया। यह तब हो रहा है जब संघर्ष तेज हो रहा है और अमेरिका तथा इजराइल के हमले जारी हैं। ईरान भी अपनी स्थिति को मजबूत बनाए हुए है, मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार जारी हैं।
ईरान की आक्रामक रणनीति
बैलिस्टिक मिसाइलों के विशाल भंडार और लगातार हो रहे हमले यह संकेत देते हैं कि ईरान केवल बचाव की मुद्रा में नहीं है, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ भी मैदान में डटा हुआ है। हालांकि, पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, मौसमी की अनुपस्थिति ने आईआरजीसी के भीतर सवाल उठाए हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि उनकी अनुपस्थिति ने एयरस्पेस यूनिट को कमजोर कर दिया है और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
ईरान का आधिकारिक रुख
हालांकि, ईरान का आधिकारिक रुख इस सब से अलग है। तेहरान किसी भी आंतरिक मतभेद को खारिज कर रहा है और अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है। जबकि पश्चिमी मीडिया सवाल उठा रहा है, ईरान अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका की रणनीति और अनिश्चितता भी इस संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ईरान की चुनौती
ईरान अब अमेरिका को खुली चुनौती दे रहा है, यह कहते हुए कि वाशिंगटन को नहीं पता कि इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए। तेहरान का दावा है कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को हासिल करने में असफल रहा है और इसी कारण से उसकी रणनीति में बदलाव आ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी सहयोगियों ने भी अमेरिका की इस युद्ध नीति पर सवाल उठाए हैं। ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भारी नुकसान के बावजूद वह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि पहले से अधिक संगठित और आक्रामक बनकर उभरा है।
संघर्ष का नया संतुलन
जैसे-जैसे यह युद्ध पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर रहा है, सवाल यह उठता है कि क्या यह संघर्ष अब एक नए संतुलन की ओर बढ़ रहा है। क्या एक सस्ता ड्रोन 800 करोड़ के अत्याधुनिक अमेरिकी फाइटर जेट को मात दे सकता है? राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरानी सेना कमजोर हो चुकी है, लेकिन इराक के आसमान से आई तस्वीरें एक नई बहस को जन्म देती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे ईरान का शाहे ड्रोन दुनिया के सबसे घातक शिकारी F15 के सामने अपनी ताकत दिखाता है।
