गाजा शांति बोर्ड पर इजरायल का कड़ा विरोध: नेतन्याहू सरकार की चिंताएं
इजरायल की आपत्ति
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा शांति बोर्ड योजना पर गंभीर आपत्ति जताई है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि इस बोर्ड के लिए सदस्यों का चयन बिना किसी इजरायली समन्वय के किया गया है, जो कि उनकी मौजूदा नीतियों के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का बयान
इस मुद्दे ने वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच नई कूटनीतिक तनाव को जन्म दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि गाजा कार्यकारी बोर्ड की संरचना के बारे में कोई जानकारी इजरायल के साथ साझा नहीं की गई और न ही इस पर सहमति ली गई। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि नेतन्याहू ने विदेश मंत्री गिदोन सार को निर्देश दिया है कि वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस विषय पर चर्चा करें।
व्हाइट हाउस की घोषणा
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को जिन सदस्यों के नामों की घोषणा की, उनमें कोई भी मौजूदा इजरायली सरकारी अधिकारी शामिल नहीं था। हालांकि, इस सूची में इजरायली मूल के अरबपति याकिर गाबाय का नाम है। इसके अलावा, समिति में ट्रंप के करीबी सहयोगी, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी और मध्य पूर्व के विभिन्न देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
शांति बोर्ड की जिम्मेदारी
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कार्यकारी समिति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा शांति बोर्ड की योजना को लागू करने की जिम्मेदारी लेगी। हालांकि, सभी सदस्यों के नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही, गाजा के दैनिक प्रशासन के लिए एक अलग फिलिस्तीनी समिति भी बनाई गई है, जो इस कार्यकारी समिति की निगरानी में कार्य करेगी।
ट्रम्प प्रशासन के संकेत
इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि गाजा के लिए तैयार किया गया अमेरिकी समर्थित युद्धविराम अब अपने दूसरे और अधिक जटिल चरण में प्रवेश कर चुका है। इस चरण में नई फिलिस्तीनी शासी व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास का निरस्त्रीकरण और गाजा के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं, फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ने भी इस कार्यकारी समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसे इजरायली हितों के अनुरूप बताया है, जिससे यह स्पष्ट है कि गाजा की भविष्य की व्यवस्था को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।
