गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल: युवाओं का विरोध और विपक्ष का समर्थन
पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक तनाव
नई दिल्ली: पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में राजनीतिक स्थिति एक बार फिर से गरमा गई है। कार्यवाहक सरकार के मंत्रिमंडल के गठन को लेकर युवाओं, विपक्षी दलों और आम जनता में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अंतरिम कैबिनेट में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया गया है जिनका पहले से राजनीतिक इतिहास रहा है, जिससे आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
युवाओं का नेतृत्व और विरोध प्रदर्शन
इस विरोध की अगुवाई जीबी यूथ मूवमेंट कर रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं। आंदोलन की शुरुआत गिलगित के चिनारबाग क्षेत्र से हुई, जहां धरना देकर कार्यवाहक सरकार के निर्णय का विरोध किया गया। यह आंदोलन धीरे-धीरे घांचे, नगर और शिगार जैसे अन्य जिलों में फैल गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंतरिम सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव कराना है, लेकिन मौजूदा कैबिनेट गठन इस दिशा में बिल्कुल विपरीत है।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्यवाहक मंत्रिमंडल में शामिल व्यक्तियों का पहले से किसी न किसी राजनीतिक दल से संबंध रहा है या वे पूर्व सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसी नियुक्तियां अंतरिम सरकार की तटस्थता को खत्म करती हैं और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का रास्ता खोलती हैं। युवाओं का मानना है कि यदि निष्पक्ष माहौल नहीं होगा, तो चुनाव परिणाम भी संदेह के घेरे में आ जाएंगे।
धरना और प्रशासन की कार्रवाई
विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे धरने में बदल गया, जिसके कारण चिनारबाग स्थित रिवर रोड को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। इससे यातायात प्रभावित हुआ और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जीबी यूथ मूवमेंट के अध्यक्ष अजफर जमशेद समेत आठ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इन गिरफ्तारियों के बाद राजनीतिक हलकों में नाराजगी और बढ़ गई।
विपक्ष का समर्थन
गिरफ्तारियों की कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी निंदा की। पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के पूर्व सदस्य सुल्तान अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक करार दिया। अवामी एक्शन कमेटी घांचे के नेता जाकिर हुसैन काजिम ने कहा कि कार्यवाहक कैबिनेट में घांचे जैसे सीमावर्ती जिले की अनदेखी से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय असंतुलन के दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्रतिनिधित्व पर आपत्ति
विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक ही जिले से कई लोगों को कैबिनेट में शामिल करना और अन्य जिलों को पूरी तरह नजरअंदाज करना निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इससे न केवल चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, बल्कि जनता का लोकतंत्र से विश्वास भी कमजोर होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री की चेतावनी
PoGB के पूर्व मुख्यमंत्री और PML-N के अध्यक्ष हाफिज उर रहमान ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक सरकार का गठन सभी जिलों की सहमति और प्रतिनिधित्व के साथ होना चाहिए। साथ ही, राजनीतिक रूप से सक्रिय या संबद्ध व्यक्तियों को अंतरिम कैबिनेट से दूर रखा जाना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा।
आंदोलन के तेज होने के संकेत
जीबी यूथ मूवमेंट ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो विरोध केवल गिलगित-बाल्टिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में रह रहे PoGB के युवाओं तक भी फैलेगा। मौजूदा हालात में यह आंदोलन न केवल अंतरिम सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता का संकेत भी दे रहा है।
