चाबहार पोर्ट: भारत की रणनीतिक भूमिका और पश्चिम एशिया का तनाव
पश्चिम एशिया में तनाव और चाबहार का महत्व
वर्तमान में, पश्चिम एशिया का एक क्षेत्र ऐसा है जहां तनाव, मिसाइलों और युद्ध की गतिविधियों की भरमार है। यहां की स्थिति इतनी संवेदनशील है कि किसी भी समय कुछ बड़ा घटित हो सकता है। कई सैन्य ठिकाने संभावित हमलों के निशाने पर हैं, लड़ाकू विमानों की गूंज सुनाई दे रही है और समुद्र में युद्धपोतों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। लेकिन इस तनाव के बीच, ईरान में एक ऐसा स्थान है जो पूरी तरह से अलग नजर आता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे यहां किसी ने अदृश्य सुरक्षा कवच स्थापित कर दिया हो। जब हम पश्चिम एशिया के हालात पर नजर डालते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि कोई भी स्थान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। लेकिन चाबहार पोर्ट की स्थिति इस संदर्भ में बिल्कुल भिन्न है। इसका मुख्य कारण भारत का बड़ा निवेश और इसकी रणनीतिक भूमिका है।
भारत का चाबहार पोर्ट में निवेश
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में चाबहार पोर्ट के विकास में महत्वपूर्ण निवेश किया है और इसे एक बड़े व्यापारिक गलियारे में बदलने की योजना बनाई है। यही कारण है कि यह केवल ईरान का बंदरगाह नहीं रह गया, बल्कि कई देशों के हितों से भी जुड़ गया है। भारत के लिए यह परियोजना अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों की रणनीति है। भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने में हमेशा एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है।
चाबहार पोर्ट पर खतरे और सुरक्षा
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर मिसाइल हमले किए जा रहे हैं, और ये हमले चाबहार पोर्ट के आसपास भी हो रहे हैं। इस युद्ध के दौरान चाबहार पोर्ट पर भी खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो चाबहार पोर्ट को भी नुकसान हो सकता है, जिसमें भारत ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का रणनीतिक निवेश सुरक्षित बना हुआ है। हाल ही में क्षेत्र में हुए मिसाइल हमलों के बावजूद, भारतीय स्वामित्व वाले शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
भारत और ईरान के बीच समझौता
भारत और ईरान के बीच मई 2016 में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड को चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों तक संचालित करने का अधिकार मिला। भारत ने लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश करने का वादा किया और करीब 250 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन भी दी।
चाबहार पोर्ट का भू-राजनीतिक महत्व
चाबहार ईरान का भारत के सबसे निकट स्थित समुद्री बंदरगाह है, जो ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर स्थित है। यह ओमान की खाड़ी में पड़ता है। चाबहार बंदरगाह परियोजना में दो मुख्य बंदरगाह शामिल हैं- शाहिद कलंतरी और शाहिद बेहेश्ती। भारत बेहेश्ती को विकसित कर रहा है। आज एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन गया है। इसलिए, वह ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता जिससे भारत के साथ उसके रिश्ते बिगड़ें।
इज़राइल की चाबहार पोर्ट पर नजर
इज़राइल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव है, लेकिन चाबहार पोर्ट को लेकर इज़राइल बेहद सावधानी बरतता है। इसकी एक बड़ी वजह भारत और इज़राइल के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और खुफिया सहयोग गहरा है। इसलिए, इज़राइल भी यह समझता है कि भारत के निवेश वाले क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना उसके लिए सही कदम नहीं होगा।
