चीन का गर्भनिरोधक टैक्स: क्या यह जन्मदर बढ़ाने में मदद करेगा?
चीन का जनसांख्यिकीय संकट
नई दिल्ली: चीन, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वर्तमान में गंभीर जनसांख्यिकीय समस्याओं का सामना कर रहा है। पहले जनसंख्या नियंत्रण के लिए सख्त नीतियों को अपनाने वाला चीन अब घटती जन्मदर को लेकर चिंतित है। इसी संदर्भ में, शी जिनपिंग सरकार ने गर्भनिरोधकों पर एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद निर्णय लिया है। लंबे समय से टैक्स छूट में रहे कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उत्पादों पर अब 13 प्रतिशत सेल्स टैक्स लागू किया गया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा।
टैक्स नीति में बदलाव का कारण
चीन में 1994 से गर्भनिरोधक साधनों पर कोई टैक्स नहीं था, क्योंकि उस समय सरकार का ध्यान तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने पर था। इसी सोच के तहत 'वन चाइल्ड पॉलिसी' लागू की गई थी, जिसने दशकों तक चीन की सामाजिक संरचना को प्रभावित किया। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। अब समस्या अधिक जनसंख्या नहीं, बल्कि जन्मदर में गिरावट और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या है। सरकार को उम्मीद है कि गर्भनिरोधकों की कीमत बढ़ाने से लोग अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित होंगे।
गिरती जन्मदर और बढ़ती चिंता
चीन के आंकड़े इस चिंता को स्पष्ट करते हैं। 2024 में लगातार तीसरे वर्ष देश की कुल जनसंख्या में गिरावट आई, जिसमें केवल 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो 2016 के मुकाबले लगभग आधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो चीन को श्रमबल की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे उत्पादन और पेंशन सेवाओं पर सरकार का खर्च बढ़ जाएगा।
बुजुर्ग आबादी बन रही है चुनौती
2024 में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 31 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, बुजुर्गों का अनुपात 20 प्रतिशत से अधिक हो गया है, और 2100 तक आधी आबादी वृद्ध हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि चीन 'अमीर होने से पहले बूढ़ा' हो सकता है, जो उसकी आर्थिक प्रगति को प्रभावित करेगा।
सरकार की दोहरी रणनीति
गर्भनिरोधकों पर टैक्स लगाकर जन्मदर बढ़ाने की कोशिश के साथ-साथ, सरकार बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक योजनाएं भी चला रही है। 1 जनवरी 2025 से जन्म लेने वाले हर बच्चे पर सालाना 3600 युआन की सब्सिडी दी जाएगी, जिसे तीन साल बाद बढ़ाकर 10,800 युआन किया जाएगा। इसके अलावा, चाइल्ड केयर सब्सिडी को टैक्स फ्री कर दिया गया है और मुफ्त पब्लिक प्री-स्कूल योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
विशेषज्ञों की आशंका
हालांकि, कई विशेषज्ञ इस नीति को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि कंडोम और गर्भनिरोधकों की कीमत बढ़ाने से जन्मदर पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, आर्थिक रूप से कमजोर युवा जोखिम भरे फैसले ले सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्मदर बढ़ाने के लिए केवल टैक्स नीति नहीं, बल्कि महंगाई, नौकरी की असुरक्षा और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, चीन की यह नई नीति देश की बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर उसकी बेचैनी को दर्शाती है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह निर्णय वास्तव में जन्मदर बढ़ाने में सफल होगा या नहीं।
