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चीन की दलाई लामा के पुनर्जन्म पर चेतावनी: तिब्बत का आध्यात्मिक भविष्य

चीन ने दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी है, जिसे उसने अपना आंतरिक मामला बताया है। इस लेख में जानें कि चीन दलाई लामा को खुद क्यों नहीं चुनना चाहता और इसके पीछे के प्रमुख कारण क्या हैं। साथ ही, दलाई लामा का चयन कैसे होता है, यह भी जानें।
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चीन की दलाई लामा के पुनर्जन्म पर चेतावनी: तिब्बत का आध्यात्मिक भविष्य

चीन की चेतावनी और दलाई लामा का पुनर्जन्म

तिब्बत के प्रमुख आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर चीन ने एक बार फिर से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिन ने भारत को चेतावनी दी है कि उसे दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। चीन का कहना है कि यह उनका आंतरिक मामला है। लेकिन यह सवाल उठता है कि एक नास्तिक सरकार आध्यात्मिक अवतार के लिए इतनी चिंतित क्यों है? यू जिन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म पूरी तरह से चीन का विषय है। उन्होंने तिब्बत की निर्वासित सरकार को अवैध करार दिया और भारत से अपील की कि वह तिब्बत की स्वतंत्रता की मांग करने वालों को समर्थन न दे। चीन की इस प्रतिक्रिया की समय सीमा महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि दलाई लामा के अनुयायियों का मानना है कि पुनर्जन्म का निर्णय दलाई लामा की इच्छा और परंपरा के अनुसार होना चाहिए। यही भारत का कड़ा रुख चीन की चिंता का मुख्य कारण बन गया है।


चीन की चिंताओं के पीछे के कारण

अब यह जानना जरूरी है कि चीन दलाई लामा को खुद क्यों नहीं चुनना चाहता। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, चीन पूर्ण नियंत्रण चाहता है। वह चाहता है कि अगला दलाई लामा उनकी कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थक हो, जिससे तिब्बत और वैश्विक बौद्ध समुदाय पर उनका प्रभाव बढ़ सके। दूसरा, भारत का डर है। तिब्बत की निर्वासित सरकार धर्मशाला में स्थित है, और चीन को चिंता है कि अगला दलाई लामा भारत के तवांग या किसी अन्य क्षेत्र से चुना जा सकता है। ऐसा होने पर तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे का दावा कमजोर हो जाएगा। तीसरा, चीन कानून का बहाना बनाता है। वह गोल्डन अर्न की प्रथा का हवाला देते हुए अपनी मंजूरी को अनिवार्य बताता है, जबकि 14वें दलाई लामा ने स्पष्ट किया है कि उनका पुनर्जन्म किसी स्वतंत्र देश में होगा, न कि चीनी कब्जे वाले तिब्बत में।


दलाई लामा का चयन कैसे होता है

दलाई लामा का चयन एक रहस्यमय और पवित्र प्रक्रिया है। यह तिब्बती बौद्ध धर्म में चुनाव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक खोज है। वर्तमान दलाई लामा अपनी मृत्यु से पहले कुछ संकेत छोड़ जाते हैं, जैसे कोई कविता या पत्र, जो उनके अगले जन्म की दिशा को इंगित करते हैं। वरिष्ठ भिक्षु तिब्बत की लुहमा, लातसो पवित्र झील पर ध्यान लगाते हैं। कहा जाता है कि झील के पानी में उन्हें उन स्थानों के दृश्य दिखाई देते हैं, जहां बच्चे का जन्म हुआ है। भिक्षु भेष बदलकर उन स्थानों पर जाते हैं और ऐसे बच्चों की तलाश करते हैं जिनमें अद्भुत लक्षण होते हैं। फिर अंतिम परीक्षा होती है, जिसमें बच्चे के सामने कई वस्तुएं रखी जाती हैं। यदि बच्चा बिना गलती के पिछले दलाई लामा की वस्तुओं को पहचान लेता है, तो उसे अवतार मान लिया जाता है।