चीन की बढ़ती भूमिका: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति में बदलाव
चीन का वैश्विक कूटनीति में उभरता स्थान
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच, चीन तेजी से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित यात्रा से पहले, ईरान ने बीजिंग में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में चीन के शीर्ष राजनयिक से मुलाकात की, जो उस समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर था। इस संकट में, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और मध्य पूर्व की स्थिरता के मुद्दे पर चीन एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभर रहा है।
ईरान की चीन यात्रा का महत्व
अराघची की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और इजराइल के बीच हालिया संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस संघर्ष के कारण, चीन की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हुई है, क्योंकि वह लंबे समय से ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। विश्लेषण के अनुसार, 2025 तक चीन ने ईरान से भेजे गए तेल का 80% से अधिक हिस्सा खरीदा। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी तेल के खरीदारों की संख्या सीमित हो गई है, जिसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को वित्तीय सहायता से रोकना है।
अमेरिका की अपील और चीन की प्रतिक्रिया
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट ने चीन से अनुरोध किया है कि वह ईरान पर दबाव डालकर होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खोले। उन्होंने बताया कि ट्रंप और शी जिनपिंग आगामी बैठक में ईरान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन व्यापारिक संघर्षविराम के बाद अपने संबंधों को स्थिर रखना चाहते हैं।
फारस की खाड़ी में बढ़ता तनाव
फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों पक्ष जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर सैन्य गतिविधियों में उलझे हुए हैं। हाल के हमलों ने संघर्षविराम को कमजोर कर दिया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने का दावा किया है, जबकि तेहरान का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाइयों से नागरिक जहाजों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
स्थिति की गंभीरता
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1500 से अधिक जहाज और 22000 नाविक समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं। वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव हो रहा है, और यदि संकट बढ़ता है, तो ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आ सकती है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है और उन्होंने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।
तेहरान की प्रतिक्रिया
हालांकि ईरान की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका की चेतावनियों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी शक्ति तेहरान को झुका नहीं सकती। ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा कि युद्ध और दबाव की नीति से केवल अस्थिरता बढ़ेगी।
चीन की भूमिका
इस घटनाक्रम में चीन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। बीजिंग ने संघर्षविराम बनाए रखने और जलडमरूमध्य से प्रतिबंध हटाने की अपील की है। चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपने वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ईरानी तेल खरीदने वाले चीनी रिफाइनरियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करें।
वैश्विक संकट का स्वरूप
विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है। यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक प्रभाव की परीक्षा बन चुका है।
