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चीन की मदद से ईरान ने अमेरिका के विमान को गिराया

हाल ही में, ईरान ने अमेरिका के एफ-15 विमान को गिराने के लिए चीन से मिली तकनीक का उपयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने ईरान को उन्नत रडार और मिसाइल तकनीक प्रदान की, जिससे यह घटना संभव हो सकी। अमेरिका ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन को चेतावनी दी है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई और अमेरिका के बचाव अभियान की जानकारी।
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चीन की मदद से ईरान ने अमेरिका के विमान को गिराया

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव में चीन की भूमिका

हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान को उन्नत रडार तकनीक प्रदान की, जिससे वह स्टील्थ विमानों का पता लगा सके। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका के एफ-15 विमान को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से गिराया, जो संभवतः चीन में निर्मित थी। यह घटना 3 अप्रैल को दक्षिण-पश्चिम ईरान में हुई थी।


इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन की सैन्य तकनीक ने ईरान को अमेरिका के खिलाफ संघर्ष में सहायता की। अमेरिकी अधिकारियों ने यह संभावना जताई है कि एफ-15ई स्ट्राइक ईगल जेट को चीन की शोल्डर फायर्ड मिसाइल से निशाना बनाया गया। हालांकि, इस मामले की जांच अभी जारी है।


अमेरिकी ऑपरेशन की जानकारी

अमेरिका ने 36 घंटे तक चलाया बचाव अभियान


विमान गिरने के बाद, अमेरिकी सेना ने एक पायलट को कुछ ही घंटों में सुरक्षित निकाल लिया, जबकि दूसरे पायलट को बचाने के लिए 36 घंटे तक अभियान चलाया गया। अंततः, उसे भी सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद, अमेरिकी सेना ने अपने हेलीकॉप्टर और विमान के मलबे को नष्ट कर दिया ताकि कोई संवेदनशील जानकारी ईरान के हाथ न लगे।


चीन की रडार तकनीक का योगदान

चीन ने ईरान को दी लंबी दूरी का रडार


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चीन ने संभवतः ईरान को अपना वाईएलसी-8बी लंबी दूरी का रडार प्रदान किया है, जो स्टील्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम है। हाल ही में, अमेरिका ने चीन की सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था, जिन पर आरोप था कि वे ईरान को उपग्रह चित्र और लाइव अपडेट प्रदान कर रही थीं।


अमेरिका ने ईरान को हथियार मुहैया कराने के लिए चीन को चेतावनी भी दी थी। हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात में इस मुद्दे को उठाया और चीन से ईरान को हथियार न देने का अनुरोध किया।