चीन के राष्ट्रपति की ताइवान पर चेतावनी: क्या एशिया में युद्ध की आहट है?
चीन का ताइवान के साथ पुनः एकीकरण का दावा
दुनिया भर में नए साल का जश्न मनाया जा रहा है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि ताइवान का चीन के साथ पुनः एकीकरण अनिवार्य है और इसे रोकना संभव नहीं है। यह बयान तब आया है जब चीन ने ताइवान के निकट अपने सबसे आक्रामक सैन्य अभ्यास का आयोजन किया है, जिसमें रॉकेट, फाइटर जेट और युद्धपोत शामिल थे। इस स्थिति ने सवाल उठाया है कि क्या एशिया 2026 में एक और युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
चीन ने इस सैन्य ड्रिल का नाम 'जस्टिस मिशन 2025' रखा है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान उसका आंतरिक मामला है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है।
शी जिनपिंग का नववर्ष संबोधन
नववर्ष की पूर्व संध्या पर, सरकारी मीडिया पर प्रसारित अपने संबोधन में, शी ने सैन्य प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश ने नवाचार के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। उन्होंने ताइवान के चीन में विलय के अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि ताइवान और चीन के लोग खून के रिश्ते में बंधे हैं।
शी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का भी उल्लेख किया, जो भारत और बांग्लादेश के लिए चिंता का विषय है। यह परियोजना पानी, पर्यावरण और सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल तो कोई सैन्य कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन ताइवान के आसमान में लड़ाकू विमान उड़ रहे हैं, जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्या 2026 में युद्ध की संभावना है?
अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या 2026 में यह केवल एक चेतावनी है या आने वाले तूफान का संकेत। ताइवान के आसमान में चीनी लड़ाकू विमानों की उपस्थिति ने दुनिया को चिंतित कर दिया है।
