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चीन में कंडोम की कीमतों में वृद्धि: सरकार का नया कदम

चीन ने 1 जनवरी 2026 से कंडोम की कीमतों में वृद्धि की है, जिसे सरकार ने जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए लागू किया है। इस निर्णय के पीछे की वजहें और पिछले वन चाइल्ड पॉलिसी के प्रभावों पर चर्चा की गई है। इसके अलावा, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और जनसंख्या में गिरावट के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या हो रहा है।
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चीन में कंडोम की कीमतों में वृद्धि: सरकार का नया कदम

कंडोम टैक्स का नया नियम


चीन ने 2026 की शुरुआत एक महत्वपूर्ण निर्णय के साथ की है। 1 जनवरी से, देश में गर्भनिरोधक साधनों, विशेषकर कंडोम की कीमतों में वृद्धि की गई है। सरकार ने इन पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू किया है, जिसे लोग अनौपचारिक रूप से 'कंडोम टैक्स' कह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।


वन चाइल्ड पॉलिसी का प्रभाव

1980 से 2015 तक चीन में सख्त वन चाइल्ड पॉलिसी लागू थी। इस नीति के तहत एक से अधिक बच्चे पैदा करने पर परिवारों पर जुर्माना लगाया जाता था और कभी-कभी जबरन नसबंदी भी की जाती थी। यह नीति उस समय जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में सहायक रही, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम गंभीर रहे हैं। आज चीन को तेजी से बढ़ती उम्र और घटती जन्म दर की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।


बच्चों की कमी के कारण

1 जनवरी 2016 से चीन ने दो बच्चों की अनुमति दी और 2021 में इसे बढ़ाकर तीन कर दिया। फिर भी, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह महंगाई और जीवनयापन की उच्च लागत मानी जा रही है।


बीजिंग स्थित यूवा पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, चीन उन देशों में शामिल है जहां बच्चों की परवरिश सबसे महंगी है। महंगे स्कूल, कड़ी शिक्षा प्रतिस्पर्धा और कामकाजी महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी बच्चों की संख्या में कमी का कारण बन रही है।


आबादी में गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन की जनसंख्या पिछले तीन वर्षों से घट रही है। 2024 में देश में केवल लगभग 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है।


सरकार के प्रयास

कंडोम पर टैक्स लगाना सरकार के कई प्रयासों में से एक है। इसके अलावा, चाइल्डकेयर सेवाओं को टैक्स से छूट दी गई है। तीन साल से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे पर सरकार सालाना 3,600 युआन (लगभग 45 हजार रुपये) की सब्सिडी प्रदान कर रही है। कई स्थानीय सरकारें बच्चों की शिक्षा को सस्ती या मुफ्त बनाने के लिए कदम उठा रही हैं।