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जापान ने हथियारों के निर्यात पर पाबंदियों में ढील दी, भारत ने किया स्वागत

जापान ने अपने हथियारों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दी है, जिसे भारत ने सराहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं। जानें इस बदलाव के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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जापान ने हथियारों के निर्यात पर पाबंदियों में ढील दी, भारत ने किया स्वागत

जापान का नया कदम

जापान ने अपने हथियारों के निर्यात पर लागू पाबंदियों में ढील दी है, जिसे भारत ने गुरुवार को सराहा। भारत ने कहा कि दोनों देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कदम खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और जापान दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है, जिसमें क्वाड समूह भी शामिल है।


पाबंदियों में बदलाव

जापान ने दशकों पुरानी हथियार निर्यात पाबंदियों में ढील दी है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से उसकी रक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पहले ये पाबंदियाँ हथियारों के निर्यात को केवल पांच श्रेणियों – बचाव, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और बारूदी सुरंग हटाने तक सीमित रखती थीं। अब जापान उन 17 देशों को घातक हथियार बेच सकता है जिनके साथ उसके रक्षा समझौते हैं, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक्स पर लिखा कि तेजी से बिगड़ते सुरक्षा माहौल में, कोई भी देश अकेले अपनी शांति और सुरक्षा की रक्षा नहीं कर सकता।


भारत का समर्थन

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जापान द्वारा रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से जुड़े तीन सिद्धांतों की समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


सुरक्षा सहयोग का विस्तार

भारत और जापान के बीच सुरक्षा सहयोग पर जॉइंट डिक्लेरेशन के तहत, दोनों पक्षों ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के हित में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का वादा किया है। इसमें सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। जापान के प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि युद्ध के बाद से 80 वर्षों तक एक शांति-प्रिय राष्ट्र के रूप में हमने जो मार्ग अपनाया है, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।