ट्रंप का ईरान पर बयान: हमले जारी रहेंगे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को जारी रखने का निर्णय लिया है, यह कहते हुए कि जब तक उनका लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक हमले जारी रहेंगे। उन्होंने तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की, जबकि ईरान का दावा है कि मृतकों की संख्या अधिक है। अमेरिका ने ईरान से न्यूक्लियर बम न बनाने की शर्त रखी है और ईरान ने इस पर सहमति जताई है। हालांकि, ईरान को आईएईए की टीम पर संदेह है कि वे खुफिया एजेंट हो सकते हैं। इस स्थिति में आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
| Mar 2, 2026, 11:37 IST
ट्रंप का ईरान के खिलाफ बयान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनका लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक हमले जारी रहेंगे। ट्रंप ने तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की, जबकि ईरान का दावा है कि मृतकों की संख्या 500 से अधिक है। ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका ने पहले किए गए हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया था। उनका उद्देश्य यह है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो जाए और कमजोर स्थिति में बातचीत करे। अमेरिका की रणनीति काइनेटिक और नॉन काइनेटिक मनोवैज्ञानिक युद्ध के माध्यम से ईरान की नेतृत्व को नरम करना है, ताकि बातचीत के दौरान अमेरिका की शर्तों को आसानी से स्वीकार किया जा सके।
ईरान की प्रतिक्रिया और अमेरिका की शर्तें
अमेरिका ने ईरान से चार प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि ईरान न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा। ईरान ने कहा है कि वह न्यूक्लियर बम नहीं बना रहा है और 400 किलो यूरेनियम 235 के प्यूरिफिकेशन को डाइल्यूट करने के लिए तैयार है। डाइल्यूट करने से यूरेनियम की मात्रा 60% से घटकर 20% और फिर 10% हो जाएगी। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि ईरान अपनी शर्तों का पालन कर रहा है, आईएईए (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की निगरानी आवश्यक है। ईरान को संदेह है कि आईएईए की टीम में सीआईए और मोसाद के एजेंट शामिल होते हैं, जो ईरान की न्यूक्लियर साइट्स की जानकारी इकट्ठा करते हैं।
आईएईए की भूमिका
ईरान का मानना है कि आईएईए की टीम, जो पिछले एक दशक से नियमित रूप से ईरान का दौरा करती रही है, वास्तव में अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंटों से भरी होती है। जब ये टीम ईरान में जाती है, तो उन्हें न्यूक्लियर साइट्स और प्रयोगशालाओं का दौरा कराया जाता है। इससे उन्हें ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की गतिविधियों की जानकारी मिलती है, जो बाद में सीआईए और अन्य खुफिया एजेंसियों के माध्यम से इजराइल के शीर्ष सैन्य नेताओं तक पहुँच जाती है।
