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ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण का विवादित बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण का दावा किया है, जिससे डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है। ट्रंप का कहना है कि यदि अमेरिका ने कदम नहीं उठाया, तो रूस और चीन इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए इसे कमजोर बताया। इस बयान ने वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन पर सवाल उठाए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी।
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ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण का विवादित बयान

ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण का दावा

रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को “किसी न किसी तरीके से” अपने अधीन लाएगा। उनका यह भी कहना है कि यदि वॉशिंगटन ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो रूस और चीन इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।


ट्रंप की टिप्पणियाँ और ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत

ट्रंप ने यह टिप्पणी एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड, जो खनिजों से भरपूर है, आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, रूस या चीन ने ग्रीनलैंड पर कोई औपचारिक दावा नहीं किया है, फिर भी ट्रंप इस मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं।


डेनमार्क के साथ संभावित समझौता

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह डेनमार्क के स्वशासित क्षेत्र ग्रीनलैंड के साथ किसी समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन अंततः अमेरिका वहां अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेगा। उनके इस बयान ने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय सहयोगियों में चिंता और नाराजगी पैदा की है। ग्रीनलैंड, जो उत्तर अमेरिका और आर्कटिक के बीच स्थित है, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका का एक सैन्य अड्डा है, जो इसकी रणनीतिक महत्वता को दर्शाता है।


ग्रीनलैंड की राजनीतिक स्थिति

ग्रीनलैंड 1953 तक डेनमार्क का उपनिवेश था और इसके बाद इसे स्वशासन मिला। हाल के वर्षों में, वहां डेनमार्क के साथ संबंधों को ढीला करने पर चर्चा होती रही है। हालांकि, ग्रीनलैंड की अधिकांश आबादी और राजनीतिक दलों का स्पष्ट कहना है कि वे अमेरिकी नियंत्रण में नहीं जाना चाहते और अपने भविष्य का निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं। ट्रंप इस दृष्टिकोण को लगातार चुनौती देते रहे हैं।


ट्रंप का सुरक्षा व्यवस्था पर मजाक

ट्रंप ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वहां की रक्षा केवल “दो डॉग स्लेज” जैसी है, जबकि रूस और चीन के पास युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। इस बयान पर कूटनीतिक हलकों में नाराजगी देखी जा रही है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका बलपूर्वक ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो इससे पिछले 80 वर्षों से चली आ रही ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।


भविष्य की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

हालांकि, ट्रंप ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि यदि इसका नाटो पर असर पड़ता है, तो पड़े, लेकिन ग्रीनलैंड को अमेरिका की जरूरत कहीं अधिक है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भविष्य में वैश्विक संतुलन को किस दिशा में ले जाएगी।