डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात: वैश्विक व्यापार और ईरान संकट पर चर्चा
महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे ट्रंप
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बीजिंग पहुंचे हैं। यह यात्रा नौ वर्षों बाद हो रही है, जिसमें ट्रंप अपने साथ शीर्ष अधिकारियों और प्रमुख अमेरिकी सीईओ का प्रतिनिधिमंडल लेकर आए हैं। यह बैठक वैश्विक व्यापार, तकनीकी मुद्दों और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
व्यापारिक युद्धविराम के बीच बैठक
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच 'व्यापारिक युद्धविराम' लागू है। यह स्थिति पिछले वर्ष दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई बैठक के बाद बनी थी, जहां ट्रंप ने चीन पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद तनाव को कम करने का प्रयास किया था।
चीन दौरे का एजेंडा
ट्रंप दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन आए हैं, जहां व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। द्विपक्षीय वार्ता से पहले, ट्रंप का पीपुल्स ग्रेट हॉल में औपचारिक स्वागत किया जाएगा, और इसके बाद वे टेंपल ऑफ हेवन का दौरा करेंगे। गुरुवार की बैठकों के बाद, ट्रंप और शी जिनपिंग एक कार्यकारी दोपहर भोज में भी शामिल होंगे।
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित
ट्रंप और शी जिनपिंग के एजेंडे में व्यापार और आर्थिक संबंध सबसे प्रमुख मुद्दे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी देखने को मिल रहा है। व्यापारिक तनाव के कारण, अमेरिकी कंपनियां अब चीन से बाहर नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं, जबकि चीनी कंपनियां यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद को सीमित कर दिया है और दुर्लभ खनिजों और धातुओं की पहुंच पर भी नियंत्रण बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने चीन को उन्नत कंप्यूटर चिप्स की आपूर्ति पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को और अधिक खराब होने से पहले स्थिर करना है।
ईरान संकट पर चर्चा
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष भी ट्रंप और शी जिनपिंग की वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका इस लड़ाई में 'जीत' हासिल करेगा और उसे चीन की मदद की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, यह माना जा रहा है कि ईरान के साथ किसी संभावित समझौते के लिए अमेरिका को चीन की कूटनीतिक भूमिका की आवश्यकता पड़ सकती है।
चीन पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का दबाव
ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक चीन पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दबाव डाला जा सकता है। अमेरिका पहले ही कई चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जिन पर ईरान को तेल निर्यात में मदद करने का आरोप है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ा है, और यह मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
