डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर विवादास्पद दावा: क्या है सच?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु गतिरोध के बीच एक चौंकाने वाला दावा किया है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका सौंपने के लिए सहमत हो गया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। ट्रंप का यह कदम बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगाता है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने तनाव को बढ़ा दिया है। अब सभी की नजरें पाकिस्तान में होने वाली वार्ता पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि ट्रंप का दावा वास्तविकता है या केवल एक कूटनीतिक रणनीति।
| Apr 18, 2026, 09:08 IST
ट्रंप का साहसी बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे परमाणु विवाद के बीच एक चौंकाने वाला दावा किया है, जिसे उनकी 'एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी' के रूप में देखा जा रहा है। एरिजोना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को सौंपने के लिए सहमत हो गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वे बड़ी खुदाई मशीनों के साथ ईरान जाकर इस सामग्री को अमेरिका लाएंगे। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का यह कदम एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जगाता है, वहीं दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने तनाव को और बढ़ा दिया है। अब सभी की नजरें पाकिस्तान में होने वाली वार्ता पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि ट्रंप का दावा वास्तविकता है या केवल एक कूटनीतिक रणनीति।
ट्रंप का सकारात्मक रुख
डोनाल्ड ट्रंप का चौंकाने वाला दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाते हुए कहा है कि ईरान "हर बात पर सहमत" हो गया है। उन्होंने एरिजोना के फीनिक्स में 'टर्निंग पॉइंट USA' कार्यक्रम में कहा, "हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे और वहां से यूरेनियम लाने के लिए बड़ी खुदाई मशीनों का इस्तेमाल करेंगे।" हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया है और यूरेनियम हस्तांतरण की किसी भी बात से इनकार किया है।
वार्ता की विफलता
पहले दौर की विफलता और बढ़ता विवाद
पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता असफल रही, जिसका मुख्य कारण परमाणु कार्यक्रम पर असहमति थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी मांगों को नहीं माना, जिससे वार्ता विफल हुई। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी मांगों को "अनुचित" बताया और कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है।
तनाव की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव
बातचीत के असफल होने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा की। ईरान ने इसे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपने वादों से पीछे हटता है, तो ईरान "आवश्यक जवाबी कदम" उठाएगा।
सोमवार को होने वाली संभावित वार्ता वैश्विक तेल आपूर्ति और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि वार्ता फिर से असफल होती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है।
