डोनाल्ड ट्रंप का ऐतिहासिक दौरा: क्या चीन से व्यापार में मिलेगी नई दिशा?
ट्रंप का बीजिंग दौरा
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार (13 मई 2026) को बीजिंग में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे। इस दौरान, वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे। इस मुलाकात पर वैश्विक स्तर पर ध्यान केंद्रित किया गया है, क्योंकि यह पिछले नौ वर्षों में किसी भी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला चीन दौरा है।
स्वागत से परे की बातें
ट्रंप का स्वागत बीजिंग एयरपोर्ट पर उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया, जो चीन के प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं। उनकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि चीन ट्रंप के स्वागत में कोई कमी नहीं रखना चाहता। 2017 में ट्रंप के पिछले दौरे पर, उनका स्वागत जूनियर नेता स्टेट काउंसलर यांग जिएची ने किया था।
हालांकि, यह दौरा केवल स्वागत और भोज तक सीमित नहीं है। अमेरिका और चीन, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, के नेताओं के बीच यह बैठक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका ईरान के मुद्दे में उलझा हुआ है, जबकि चीन खुद को एक मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
क्या व्यापार ही मुख्य मुद्दा है?
ट्रंप ने इस दौरे को व्यापार से जोड़ते हुए कहा कि वह शी जिनपिंग से अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन के बाजार को खोलने की मांग करेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति इससे कहीं अधिक जटिल है।
विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिन्द्र सचदेव का मानना है कि इस मुलाकात का मुख्य मुद्दा व्यापार है। यदि ट्रंप चीन के साथ व्यापारिक समझौता कर लेते हैं और अमेरिकी निर्यात को बढ़ा लेते हैं, तो वह इसे घरेलू राजनीति में एक बड़ी जीत के रूप में पेश कर सकते हैं।
अमेरिका का 5 B योजना
सचदेव के अनुसार, अमेरिका का ध्यान '5 B's' पर है, जिसमें Boeing, Beef, Beans, Board of Trade और Board of Investment शामिल हैं। अमेरिका चाहता है कि चीन अधिक बोइंग विमान खरीदे, अमेरिकी कृषि उत्पादों और बीफ का आयात बढ़ाए, और निवेश तथा व्यापार के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करे।
चीन का 3 T एजेंडा
चीन भी इस बैठक के लिए तैयार है और उसका ध्यान '3 T's' पर है - Tariff, Taiwan और Technology। बीजिंग चाहता है कि अमेरिका टैरिफ में छूट दे, ताइवान पर अपने रुख को नरम करे, और AI तथा चिप तकनीक पर लगी रोक को हटाए।
