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डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: क्या है शी जिनपिंग की अनुपस्थिति का मतलब?

डोनाल्ड ट्रंप का हालिया चीन दौरा कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए है, लेकिन शी जिनपिंग की अनुपस्थिति ने सवाल उठाए हैं। क्या यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ है? जानें इस दौरे की खासियतें और संभावित बातचीत के विषय।
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डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: क्या है शी जिनपिंग की अनुपस्थिति का मतलब?

ट्रंप का चीन दौरा शुरू


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर चीन पहुंच चुके हैं। बीजिंग एयरपोर्ट पर उनके स्वागत को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर नहीं आए। उनकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति हान झेंग ने ट्रंप का स्वागत किया, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


स्वागत समारोह की विशेष तैयारियां

रिपोर्टों के अनुसार, एयरपोर्ट पर हान झेंग के साथ अमेरिका में चीन के राजदूत ज़ी फेंग और विदेश मामलों के कार्यकारी उपमंत्री मा झाओक्सू भी मौजूद थे। ट्रंप के स्वागत के लिए चीन ने विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया था। एयरपोर्ट पर सफेद और नीली वर्दी में लगभग 300 युवा तैनात थे, और एक बैंड पार्टी भी समारोह का हिस्सा बनी।


शी जिनपिंग की अनुपस्थिति पर सवाल

हालांकि, यह सवाल उठ रहा है कि शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत क्यों नहीं कर पाए। इससे पहले, जब ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल का दौरा किया था, तब वहां के नेता एयरपोर्ट पर मौजूद रहे थे। चीन ने अपने प्रोटोकॉल के अनुसार उपराष्ट्रपति को भेजा।


आमतौर पर, चीन में राष्ट्रपति विदेशी नेताओं का स्वागत एयरपोर्ट पर नहीं करते हैं। इससे पहले पुतिन और किम जोंग उन जैसे नेताओं के दौरे पर भी जिनपिंग एयरपोर्ट नहीं आए थे। आखिरी बार 2009 में जब वह उपराष्ट्रपति थे, तब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा का स्वागत किया था।


ट्रंप का दौरा: महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

ट्रंप का यह दौरा कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। अमेरिका और चीन के बीच एआई तकनीक, दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और व्यापारिक टैरिफ जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा, ताइवान के मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है। अमेरिका ताइवान को अपना प्रमुख सहयोगी मानता है, जबकि चीन उस पर अपना दावा करता है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात से इस मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट हो सकता है।