डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ईरान आत्मसमर्पण के करीब
ईरान में नेतृत्व की कमी का असर
कहा, ईरान में यह कोई नहीं जानता की उनका नेता कौन है इसलिए सरेंडर की घोषणा में देरी हो रही
वॉशिंगटन : अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई जारी है। इन हमलों के कारण ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। तेहरान और उसके अन्य प्रमुख शहर अब खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान पर अंतिम और निर्णायक हमला नहीं किया है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
ट्रंप का आत्मसमर्पण का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जी7 देशों के नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक में कहा कि ईरान 'लगभग आत्मसमर्पण करने वाला है'। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों को बताया कि उन्होंने 'एक ऐसे कैंसर को खत्म कर दिया है जो हम सभी को खतरा दे रहा था।'
सरेंडर की देरी का कारण
ट्रंप ने जी-7 कॉल के दौरान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के परिणामों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'कोई नहीं जानता कि नेता कौन है, इसलिए ऐसा कोई नहीं है जो आत्मसमर्पण की घोषणा कर सके।' शुक्रवार को, ट्रंप ने ईरान के नेताओं पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध के दो सप्ताह पूरे होने के साथ ही इस क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों के भारी आदान-प्रदान के बीच उन्हें मारना उनका बड़ा सम्मान था।
ईरानी सेना को फिर से सरेंडर करने की अपील
ट्रंप ने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकेगा। उन्होंने ईरानी सेना और उससे जुड़े समूहों से हथियार डालने की अपील की। ट्रंप के अनुसार, यदि ईरान संघर्ष को जारी रखता है, तो उसके लिए हालात और कठिन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पहले कार्यकाल से लेकर अब तक उन्होंने अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली और घातक सैन्य ताकत बना दिया है। उनका कहना है कि ईरान के पास अमेरिका के हमलों का सामना करने की क्षमता नहीं है।
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