डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा का आश्वासन
अमेरिकी राष्ट्रपति का नया कदम
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उत्पन्न खतरे के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ, तो अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही, उन्होंने एक संघीय वित्तीय संस्था को खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
ट्रंप का संदेश
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक संदेश में कहा कि उन्होंने संयुक्त राज्य विकास वित्त निगम (डीएफसी) को खाड़ी में समुद्री व्यापार, विशेषकर ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित शिपमेंट के लिए किफायती दरों पर राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय गारंटी देने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि यह सुविधा सभी शिपिंग कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी, ताकि अस्थिर माहौल में व्यापारिक विश्वास बना रहे।
अमेरिका की प्रतिबद्धता
"Effective IMMEDIATELY, I have ordered the United States Development Finance Corporation (DFC) to provide, at a very reasonable price, political risk insurance and guarantees for the Financial Security of ALL Maritime Trade... If necessary, the United States Navy will begin… pic.twitter.com/pIJyFwL78j
— The White House (@WhiteHouse) March 3, 2026
राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आने देगा। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो अमेरिकी नौसेना तुरंत कार्रवाई करते हुए टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य के चार दिनों तक बंद रहने की खबरों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मची हुई है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और विश्व ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बढ़ते जोखिमों के चलते तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। याहू फाइनेंस के आंकड़ों के अनुसार, रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो ऊर्जा कीमतों में और वृद्धि संभव है। ऐसे परिदृश्य में अमेरिका का यह कदम वैश्विक बाजारों को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
