डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी: क्या होगा अगला कदम?
ट्रंप की ईरान पर कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी दी है। शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक में ईरान का मुद्दा उठेगा, लेकिन मुख्य ध्यान व्यापार पर रहेगा। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप का ईरान पर नियंत्रण का दावा
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान पूरी तरह से अमेरिका के नियंत्रण में है। उन्होंने स्पष्ट किया, "या तो समझौता होगा या फिर उनका सफाया हो जाएगा। हमारी जीत निश्चित है।" इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप है और अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखे हैं।
हेगसेथ का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कांग्रेस को बताया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की अनुमति के बिना वहां से कुछ भी नहीं गुजर सकता। ईरान की धमकियों के बावजूद यह जलमार्ग सुरक्षित है, जो विश्व के बड़े तेल निर्यात का केंद्र है।
हेगसेथ ने संसद में कहा कि सेना के पास बम और मिसाइलों का पर्याप्त भंडार है। ईरान इस जलडमरूमध्य पर अपने प्रभाव का दावा करता रहा है, जबकि अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में बताता है।
कुवैत का ईरान पर गंभीर आरोप
इस बीच, कुवैत ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाया है। कुवैत का कहना है कि मई की शुरुआत में ईरानी अर्धसैनिक बलों ने बुबियान द्वीप पर हमले की कोशिश की। यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है, जहां चीन की मदद से मुबारक अल कबीर बंदरगाह का निर्माण हो रहा है। कुवैत की सेना ने इस हमले को विफल कर दिया।
इस घटना में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो भागने में सफल रहे। ईरान ने अभी तक इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
इजरायल की तैनाती और बढ़ता खतरा
संघर्ष फिर से भड़कने के खतरे को देखते हुए, इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात में आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली और अपने सैनिकों को तैनात किया है। यह अबू धाबी और दुबई में इजरायली सेना की पहली खुली तैनाती है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाता है।
ईरानी राजनयिक काजेम गरीबाबादी ने कहा कि धमकियों और दबाव से सच्ची शांति नहीं बन सकती। ट्रंप इस सप्ताह चीन जा रहे हैं, जहां ईरान का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा। चीन ईरानी तेल का आयात करता रहा है और जलडमरूमध्य बंद होने से उसे भी नुकसान हो रहा है।
