Newzfatafatlogo

डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति: पाकिस्तान के लिए बढ़ता खतरा

डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर हमले की योजनाओं ने पाकिस्तान में चिंता की लहर पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में किसी भी प्रकार की उथल-पुथल पाकिस्तान के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं। बलूचिस्तान में विद्रोह की आशंका और शरणार्थियों का नया संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। जानें इस स्थिति के संभावित परिणाम और पाकिस्तान की बढ़ती चिंताएं।
 | 
डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति: पाकिस्तान के लिए बढ़ता खतरा

पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ी


नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित हमले की योजनाओं ने पाकिस्तान में चिंता की लहर पैदा कर दी है। यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो वहां राजनीतिक बदलाव संभव है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा। पाकिस्तान को आशंका है कि इससे उसके बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे देश के टूटने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। दोनों देशों के बीच की सीमा लगभग 900 किलोमीटर लंबी है, जो पाकिस्तान के संवेदनशील क्षेत्रों से सटी हुई है।


ईरान पर हमले का पाकिस्तान पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में किसी भी प्रकार की उथल-पुथल पाकिस्तान के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं। ट्रंप की योजना के अनुसार यदि अमेरिका हमला करता है, तो ईरान में अराजकता फैल सकती है, जिससे सीमा पार से आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और शरणार्थियों का आगमन बढ़ सकता है।


एक प्रमुख पाकिस्तानी समाचार पत्र में प्रकाशित लेख के अनुसार, ईरान में सत्ता परिवर्तन पाकिस्तान के लिए विनाशकारी हो सकता है। पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में कोई भी बदलाव, चाहे वह आंतरिक हो या बाहरी, पाकिस्तान को सीधे प्रभावित करेगा।


बलूचिस्तान में विद्रोह की आशंका

पाकिस्तान बलूचिस्तान को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है, जो ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान से सटा हुआ है। यहां बलूच लोग निवास करते हैं और दोनों पक्षों के बीच जातीय और भाषाई संबंध हैं। यदि ईरान में अस्थिरता आती है, तो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोही समूहों की ताकत बढ़ सकती है।


विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में आतंकवाद पर जो नियंत्रण पाया है, वह सब बेकार हो सकता है। यहां कई विद्रोही समूह सक्रिय हैं, जो सुरक्षाबलों और चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाते हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं यहां चल रही हैं, जो अशांति से प्रभावित हो सकती हैं। बलूच विद्रोही यह दावा करते हैं कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, जिससे अलगाव का खतरा बढ़ जाता है।


शरणार्थियों और आर्थिक संकट की संभावना

ईरान पर हमले से पाकिस्तान में शरणार्थियों का नया संकट उत्पन्न हो सकता है। 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद लाखों शरणार्थी पाकिस्तान आए थे, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। यदि ईरान से लोग आते हैं, तो आईएमएफ के कर्ज पर चल रहा पाकिस्तान इसे सहन नहीं कर पाएगा।


पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम का कहना है कि पाकिस्तान ने पहले ईरान-इजरायल तनाव में ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया था। वे चेतावनी देते हैं कि किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप, चाहे वह आर्थिक हो या सैन्य, स्थिति को और खराब कर देगा।


पाकिस्तान की बढ़ती चिंताएं

पाकिस्तानी विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में जबरन बदलाव का असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है, प्रॉक्सी युद्ध छिड़ सकते हैं और चीन, रूस जैसी शक्तियां भी शामिल हो सकती हैं।


पाकिस्तान नहीं चाहता कि ईरान कमजोर हो, क्योंकि इससे उसके अपने अस्तित्व पर सवाल उठ सकते हैं। कुल मिलाकर, ट्रंप की ईरान नीति पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है, जहां टूटने का डर सता रहा है।