डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान के प्रति नई रणनीति और उसके प्रभाव
ट्रंप की तारीफों का असर
हाल के महीनों में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुलना में सेना प्रमुख असीम मुनीर की अधिक सराहना की है। व्हाइट हाउस में उनके साथ लंच के दौरान, ट्रंप ने मुनीर को 'माई फेवरेट फील्ड मार्शल' कहकर सबको चौंका दिया।
पाकिस्तान को प्राथमिकता
ट्रंप ने बार-बार पाकिस्तान को भारत की तुलना में अधिक महत्व दिया है। उन्होंने गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान को शामिल किया और पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव रखा, हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को गाजा नहीं भेजा है।
पाकिस्तान का इजरायल विरोधी रुख
ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में, पाकिस्तान ने एक अलग भूमिका निभाई है। उसने मध्यस्थता की कोशिश की और कुछ हफ्तों का युद्धविराम लागू किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले की निंदा की, लेकिन इजरायल पर भी तीखे हमले किए। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को 'कैंसर' कहा, लेकिन बाद में उन्हें अपने शब्द वापस लेने पड़े।
सऊदी अरब की दुविधा
इजरायल और यूएई के बीच बढ़ती नजदीकी से सऊदी अरब चिंतित है। पिछले साल दोहा पर इजरायली हमले ने रियाद को सतर्क कर दिया। इसके बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक रक्षा समझौता किया, जिसमें तुर्की और मिस्र को भी शामिल करने की योजना है। अमेरिका पाकिस्तान और सऊदी अरब पर इजरायल को मान्यता देने का दबाव बना रहा है।
पाकिस्तान के लिए इजरायल को मान्यता देना मुश्किल
पाकिस्तान के लिए इजरायल को मान्यता देना आसान नहीं होगा। उसके पासपोर्ट पर लिखा है कि यह इजरायल को छोड़कर पूरी दुनिया में मान्य है। यदि पाकिस्तान दबाव में आकर इजरायल को मान्यता देता है, तो उसे अपने पासपोर्ट में बदलाव करना पड़ेगा।
अशांति का डर
पाकिस्तान में इजरायल को मान्यता देने से अशांति फैलने का खतरा है। जनता सड़कों पर उतर सकती है, जिससे विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यही कारण है कि कोई भी सरकार इतना बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहती। ट्रंप प्रशासन अब पाकिस्तान से यह कीमत चुकाने का दबाव बना रहा है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका की मदद
ट्रंप की पाकिस्तान की तारीफ का एक और कारण यह है कि ईरान युद्ध में अमेरिका को पाकिस्तान की मदद की आवश्यकता थी। अमेरिका ईरान के खिलाफ नूर खान एयरबेस का उपयोग करना चाहता था, और पाकिस्तान ही एक ऐसा देश था जो तेहरान तक अमेरिका का संदेश पहुंचा सकता था।
