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दक्षिण एशिया में बढ़ता तनाव: अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों पर किया हमला

दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति गंभीर मोड़ पर है, जब अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों पर की गई हवाई बमबारी का प्रतिशोध है। तालिबान ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी घुसपैठ बंद नहीं की, तो वे और बड़े शहरों को निशाना बनाएंगे। इस संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है और आम जनता तथा शरणार्थियों पर गंभीर प्रभाव डाला है। क्या यह संघर्ष एक नए मानवीय संकट का कारण बनेगा? जानें पूरी जानकारी।
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दक्षिण एशिया में बढ़ता तनाव: अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों पर किया हमला

खतरनाक मोड़ पर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति


नई दिल्ली: दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच का तनाव अब एक संभावित सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार को अफगान रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से यह जानकारी दी कि उनकी वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान शहरों पर की गई हवाई बमबारी का प्रतिशोध मानी जा रही है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर संकट में डाल दिया है।


अफगान वायुसेना की निर्णायक कार्रवाई

शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे, अफगान वायुसेना ने पाकिस्तान में एक साहसिक सैन्य ऑपरेशन शुरू किया। इस्लामाबाद के निकट फैसलाबाद में एक प्रमुख सैन्य कैंप को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, नौशेरा के आर्मी कैंटोनमेंट, जमरूद की सैन्य कॉलोनी और एबटाबाद के ठिकानों पर भी सटीक बमबारी की गई। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के सलाहकार 'आशिक' की मौत की खबर सबसे महत्वपूर्ण है। तालिबान का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।


तालिबान की पाकिस्तान को चेतावनी

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हवाई हमलों को केवल शुरुआत बताया है। उनका कहना है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी घुसपैठ बंद नहीं की, तो वे भविष्य में और बड़े शहरों को निशाना बनाएंगे। यह कार्रवाई उस हवाई घुसपैठ का जवाब है, जो पाकिस्तान ने एक रात पहले काबुल, कंधार और पक्तिका जैसे अफगान शहरों में की थी। अफगानिस्तान का संदेश स्पष्ट है कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी सैन्य सीमा तक जाने को तैयार हैं।


पाकिस्तान का सब्र टूट चुका

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने वर्तमान स्थिति को 'खुले युद्ध' के रूप में वर्णित किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। इस्लामाबाद का आरोप है कि नाटो सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान में जो शांति की उम्मीद थी, वह अब खतरे में है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अफगान दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके किसी भी सैनिक को बंदी नहीं बनाया गया है।


हताहतों की संख्या पर विवाद

दोनों देशों के आधिकारिक बयानों में हताहतों की संख्या को लेकर भारी विरोधाभास है। अफगानिस्तान का दावा है कि उनके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और कई को पकड़ा गया है। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि उन्होंने 133 तालिबानी लड़ाकों को मार गिराया है और 200 से अधिक घायल हुए हैं। पाकिस्तान के सलाहकार अताउल्लाह तरार ने केवल दो मौतों की पुष्टि की है। इन दावों के बीच जमीनी हकीकत अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।


आम जनता और शरणार्थियों पर असर

सीमा पर बढ़ते तनाव का सबसे बुरा असर आम जनता और असहाय शरणार्थियों पर पड़ रहा है। टोरखम बॉर्डर पर बड़ी संख्या में मौजूद अफगान शरणार्थियों को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल लाखों लोग पाकिस्तान छोड़कर अपने वतन लौटे थे, लेकिन मौजूदा सैन्य संघर्ष ने इस प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो दक्षिण एशिया में एक नया और भयावह मानवीय संकट उत्पन्न होना तय है।