दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष की जटिलताएँ
दक्षिण एशिया में तनाव का नया अध्याय
जब दो देशों के बीच संघर्ष होता है, तो अक्सर तीसरे पक्ष को लाभ मिलता है। दक्षिण एशिया में वर्तमान स्थिति को देखते हुए, कई विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह टकराव केवल दो राष्ट्रों की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक वैश्विक राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं। हाल ही में, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का धैर्य अब समाप्त हो चुका है और इसे उन्होंने खुली जंग का नाम दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान भारत का सहयोगी बन चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है.
भू-राजनीतिक रणनीतियों का खेल
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले विचारक एलेक्जेंडर डूगिन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ती लड़ाई वास्तव में एक बड़ी भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। डूगिन का मानना है कि इस संघर्ष के पीछे अमेरिका की रणनीति हो सकती है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स को कमजोर करना है। उनके अनुसार, वर्तमान बहुध्रविकरण में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है, और अमेरिका इस गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है।
भारत की स्थिति
भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह किसी भी संघर्ष या युद्ध का समर्थन नहीं करता है और क्षेत्र में शांति की कामना करता है। अफगानिस्तान में भारत ने कई विकास परियोजनाओं, जैसे सड़कें, बांध और शिक्षा से जुड़े कार्य किए हैं। इसलिए कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अफगानिस्तान की राजनीति में भारत का प्रभाव है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत किसी युद्ध का हिस्सा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, पाकिस्तान को अपनी सीमाओं के भीतर कई आतंकवादी हमलों का सामना करना पड़ा है।
संघर्ष की नई शुरुआत
पिछले हफ्ते, 21-22 फरवरी की रात को, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयर स्ट्राइक कर 80 से अधिक तालिबान आतंकियों को मारने का दावा किया। तालिबान ने इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 18 लोगों की मौत की बात कही है.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान ने पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच जारी संघर्ष में मध्यस्थता की पेशकश की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर मानवाधिकार कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया है।
