दक्षिण चीन सागर में अमेरिका का नया कदम: USS अब्राहम लिंकन की तैनाती से बढ़ी चीन की चिंता
अमेरिका की नई सैन्य तैनाती
नई दिल्ली: हाल ही में वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे चीन की चिंताएँ बढ़ गई हैं। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपने शक्तिशाली परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को तैनात किया है। इस तैनाती के साथ, इस कैरियर से अत्याधुनिक F-35C स्टेल्थ फाइटर जेट्स की उड़ानें भी भरी गई हैं। जबकि अमेरिकी नौसेना इसे नियमित गश्त का हिस्सा बताती है, रक्षा विशेषज्ञ इसे चीन के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत मानते हैं।
USS अब्राहम लिंकन की उड़ानें
अमेरिकी नौसेना द्वारा साझा की गई तस्वीरें
बुधवार को, अमेरिकी नौसेना ने कुछ तस्वीरें जारी कीं, जिनमें USS अब्राहम लिंकन को दक्षिण चीन सागर में उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है। इन तस्वीरों में एयरक्राफ्ट कैरियर के डेक से लड़ाकू विमानों की उड़ान और लैंडिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। अमेरिकी नौसेना का कहना है कि इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में किसी भी आक्रामक गतिविधि को रोकना, सहयोगी देशों के साथ सैन्य सहयोग को मजबूत करना और समुद्री स्थिरता बनाए रखना है।
दक्षिण चीन सागर का महत्व
दक्षिण चीन सागर की संवेदनशीलता
दक्षिण चीन सागर लंबे समय से वैश्विक राजनीति का एक विवादित क्षेत्र रहा है। चीन इस समुद्री क्षेत्र पर अपने ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और अन्य देश भी इसके विभिन्न हिस्सों पर अपना हक जताते हैं। चीन के दावे फिलीपींस जैसे देशों के हितों से टकराते हैं, जो अमेरिका का प्रमुख रक्षा सहयोगी है। इस प्रकार, अमेरिका की सैन्य उपस्थिति इस क्षेत्र में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग
समुद्री व्यापार का मार्ग
दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका का मानना है कि यदि किसी एक देश का इस क्षेत्र पर नियंत्रण हो गया, तो वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अपने अनुसार प्रभावित कर सकता है। इसलिए, अमेरिका यहाँ "नौवहन की स्वतंत्रता" बनाए रखने की बात करता रहा है।
USS अब्राहम लिंकन का शक्ति प्रदर्शन
F-35C जेट्स का प्रदर्शन
USS अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने वाले विमानों में F-35C लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर जेट्स शामिल हैं। यह F-35 श्रृंखला का वह संस्करण है, जिसे विशेष रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान और EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट भी इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा हैं। ये सभी विमान मिलकर अमेरिका की अत्याधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हैं।
USS अब्राहम लिंकन का इतिहास
पिछले ऑपरेशन्स
USS अब्राहम लिंकन नवंबर के अंत में अमेरिका के सैन डिएगो पोर्ट से रवाना हुआ था। इससे पहले, यह फिलीपींस सागर और गुआम के आसपास भी सैन्य अभ्यास और ऑपरेशन कर चुका है। अब इसका दक्षिण चीन सागर में पहुंचना क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना रहा है।
भविष्य की रणनीति पर अनिश्चितता
आगे की रणनीति पर सस्पेंस
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि USS अब्राहम लिंकन कितने समय तक दक्षिण चीन सागर में तैनात रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर इस एयरक्राफ्ट कैरियर को मध्य पूर्व भी भेजा जा सकता है, खासकर यदि ईरान से जुड़े हालात और तनावपूर्ण होते हैं। इस प्रकार, अमेरिका की यह तैनाती न केवल एशिया में, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
