दावोस में मैक्रों का भाषण: अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी और लोकतंत्र की चुनौतियाँ
दावोस में मैक्रों का प्रभावशाली भाषण
नई दिल्ली: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसा भाषण दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए उन शक्तियों की आलोचना की, जो नियमों और सहयोग के बजाय दबाव और ताकत की राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी
मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थापित नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बिना किसी विशेष देश का नाम लिए यह स्पष्ट किया कि वैश्विक मंच पर अब 'ताकतवर की बात' अधिक सुनाई दे रही है, जबकि नियम और संस्थाएं हाशिए पर जा रही हैं।
लोकतंत्र और तानाशाही के बीच टकराव
फ्रांस के राष्ट्रपति ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव बढ़ रहा है और कई स्थानों पर तानाशाही प्रवृत्तियां मजबूत हो रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2024 में संघर्षों और युद्धों की संख्या अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टकराव अब सामान्य स्थिति बनता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी
मैक्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून को कई बार नजरअंदाज किया जा रहा है और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कमजोर की जा रही है। उनके अनुसार, कुछ बड़ी शक्तियां इन संस्थाओं से दूरी बना रही हैं या उन्हें निष्क्रिय कर रही हैं, जिससे वैश्विक समस्याओं का समाधान करने की सामूहिक क्षमता प्रभावित हो रही है।
टैरिफ और दबाव की राजनीति पर टिप्पणी
अमेरिका की व्यापार नीतियों की ओर इशारा करते हुए मैक्रों ने कहा कि टैरिफ का उपयोग अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने इसे संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
सहयोग और आत्मनिर्भरता का महत्व
इन चुनौतियों का समाधान बताते हुए मैक्रों ने अधिक सहयोग, नए दृष्टिकोण और मजबूत आर्थिक संप्रभुता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से यूरोप के लिए रणनीतिक आत्मनिर्भरता और साझा ताकत विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि वैश्विक असंतुलन का सामना किया जा सके।
मैक्रों का सनग्लास लुक
इस भाषण के दौरान मैक्रों का आसमानी रंग का सनग्लास भी चर्चा का विषय बना। आमतौर पर बिना चश्मे के नजर आने वाले राष्ट्रपति का यह अंदाज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी स्टाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि आंखों में स्वास्थ्य समस्या के कारण था।
स्वास्थ्य कारणों से चश्मा पहनना
मैक्रों ने बताया कि उनकी आंख में हल्की परेशानी है, इसलिए उन्हें सनग्लास पहनना पड़ा। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंख की नस फटने के कारण सूजन आ गई थी, जिसके चलते उन्हें यह एहतियात बरतनी पड़ी।
सम्मान और सहयोग की बात
अपने भाषण के अंत में मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और यूरोप 'बुलीज़' की राजनीति के बजाय सम्मान, संवाद और सहयोग में विश्वास करते हैं। उन्होंने 2026 तक वैश्विक संतुलन सुधारने, सुरक्षा और रक्षा में निवेश बढ़ाने तथा अधिक स्थिर और विकासशील दुनिया के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
