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नासा का आर्टेमिस-II मिशन: चांद की ओर मानव यात्रा की नई शुरुआत

नासा ने 54 साल बाद आर्टेमिस-II मिशन के तहत मानवों को चांद की ओर भेजने की ऐतिहासिक शुरुआत की है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो लगभग 10 दिनों तक चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे। यह परीक्षण मिशन भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए आवश्यक तकनीक और क्षमताओं का परीक्षण करेगा। जानें इस मिशन के महत्व और वैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में।
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नासा का आर्टेमिस-II मिशन: चांद की ओर मानव यात्रा की नई शुरुआत

नासा का ऐतिहासिक मिशन

फ्लोरिडा: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने लगभग 54 वर्षों के बाद एक बार फिर मानवों को चांद की ओर भेजने की ऐतिहासिक शुरुआत की है। इस मिशन का नाम 'आर्टेमिस-द्वितीय' है, जिसे भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।


इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: क्रिस्टिना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन और जेरेमी हैनसेन। इन्हें स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह यात्रा लगभग 10 दिनों की होगी, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 4,06,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। इसे अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्राओं में से एक माना जा रहा है।



आर्टेमिस-द्वितीय मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद के निकट जाएंगे, लेकिन वहां उतरने का कार्यक्रम नहीं है। यह एक परीक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए आवश्यक तकनीक और क्षमताओं का परीक्षण करना है। पूरा मिशन लगभग 10 दिनों में पूरा होगा, और अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेंगे। नासा के अनुसार, यह मिशन चांद पर स्थायी मानव बस्ती स्थापित करने और मंगल ग्रह तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


यह मिशन केवल चंद्रमा की परिक्रमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरे अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन भी करेगा। अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर जाकर अंतरिक्षीय विकिरण और कठिन परिस्थितियों का सामना करेंगे। उनके शरीर में होने वाले सभी परिवर्तनों को रिकॉर्ड किया जाएगा, जो भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।


मिशन का एक प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोग “ऑर्गन-ऑन-ए-चिप” तकनीक है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त से प्राप्त कोशिकाओं को सूक्ष्म चिप पर विकसित किया जाएगा। एक चिप अंतरिक्ष में भेजी जाएगी, जबकि दूसरी पृथ्वी पर रखी जाएगी। मिशन के बाद दोनों की तुलना कर डीएनए क्षति, टेलोमियर लंबाई और अन्य जैविक संकेतकों में अंतर का अध्ययन किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब ऐसा प्रयोग पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर किया जा रहा है।


यह ध्यान देने योग्य है कि इस मिशन की प्रक्षेपण तिथियों में पहले कई बार बदलाव किया गया था। इसे पहले फरवरी 2026 में लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे स्थगित करना पड़ा। इसके बाद मार्च में भी संभावित तिथियां तय की गईं, लेकिन मिशन तब भी लॉन्च नहीं हो सका।


लगातार परीक्षणों और तैयारियों के बाद, अंततः नासा ने अप्रैल 2026 में इस ऐतिहासिक मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया। यदि मौसम या तकनीकी कारणों से देरी होती, तो अप्रैल में अन्य वैकल्पिक तिथियां भी निर्धारित की गई थीं।


कुल मिलाकर, आर्टेमिस-द्वितीय मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है और भविष्य में चांद और उससे आगे मानव बस्ती की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।