नेपाल की नई सरकार के बड़े फैसले: सैलरी हर 15 दिन और राजनीतिक यूनियनों पर रोक
नेपाल में बालेंद्र शाह की सरकार के नए निर्णय
नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पहले पूर्व प्रधानमंत्रियों की गिरफ्तारी और 100 नेताओं-मंत्रियों की संपत्ति की जांच शुरू की गई, अब दो और महत्वपूर्ण फैसले सामने आए हैं। सरकारी कर्मचारियों को अब महीने में दो बार वेतन मिलेगा और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक छात्र-कर्मचारी संघों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हर 15 दिन में वेतन का नया नियम
नेपाल सरकार ने 17 अप्रैल को वित्त मंत्रालय के स्तर पर निर्णय लिया कि सरकारी कर्मचारियों को अब हर महीने एक बार की बजाय हर 15 दिन में वेतन दिया जाएगा। संबंधित विभागों को इस बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। जब कर्मचारियों के पास बार-बार पैसा आएगा, तो वे अधिक खर्च करेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था में गति आएगी।
नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। अधिकांश देशों में सरकारी कर्मचारियों को महीने में एक बार वेतन दिया जाता है। दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में भी यही व्यवस्था है। नेपाल का यह नया प्रयोग इसलिए चर्चा में है क्योंकि इससे पहले ऐसा कहीं नहीं देखा गया।
विश्वविद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सोमवार को सिंह दरबार में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुखों के साथ तीन घंटे की बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अब विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में राजनीतिक दलों पर आधारित छात्र संघ और कर्मचारी संघों को भंग किया जाएगा। कुलपतियों ने बताया कि 'जनरेशन जेड' आंदोलन के बाद छात्र राजनीति अब अप्रासंगिक हो गई है।
प्रधानमंत्री शाह ने जोर देकर कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई कानून इस फैसले को रोक नहीं सकता। अब इन संस्थानों में केवल पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं होंगी, और राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी।
