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नेपाल की लिपुलेख दर्रे पर आपत्ति, भारत ने खारिज किया दावा

भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर विवाद फिर से गरमा गया है। नेपाल ने इस क्षेत्र पर अपने अधिकार का दावा करते हुए भारत की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई है। भारत ने नेपाल के दावे को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ बताया है। जानें इस विवाद की जड़ें और दोनों देशों के बीच के संबंधों पर इसका प्रभाव।
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नेपाल की लिपुलेख दर्रे पर आपत्ति, भारत ने खारिज किया दावा

नेपाल की आपत्ति और भारत का जवाब

भारत ने हाल के वर्षों में लिपुलेख दर्रे से संबंधित निर्णयों पर नेपाल की लगातार आपत्तियों का सामना किया है। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह इसी रुख को अपनाया है। हाल ही में, नेपाल ने एक बार फिर लिपुलेख दर्रे को लेकर अपनी आपत्ति व्यक्त की, जिसे भारत ने ठुकरा दिया।


नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को लिपुलेख दर्रे से आयोजित करने पर विरोध जताया है। भारत ने स्पष्ट किया कि नेपाल का इस क्षेत्र पर दावा न तो सही है और न ही किसी ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित।


नेपाल सरकार की आपत्ति का विवरण

रविवार को, नेपाल सरकार ने भारत और चीन को राजनायिक स्तर पर चेतावनी भेजकर लिपुलेख दर्रे से यात्रा कराने पर अपनी आपत्ति दर्ज की। नेपाल का कहना है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी पर उसका अधिकार है और भारत को वहां कोई गतिविधि नहीं करनी चाहिए।


विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल के दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'भारत का रुख हमेशा स्पष्ट और तर्कसंगत रहा है। ऐसे दावे न तो उचित हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं।'


रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय:-
लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है। यह कोई नई बात नहीं है। भारत नेपाल के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है और सीमा संबंधी लंबित मुद्दों को संवाद के माध्यम से सुलझाने को इच्छुक है।


नेपाल की चिंताएं

नेपाल लिपुलेख दर्रे को अपना मानता है, जबकि भारत कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इसका उपयोग करता रहा है। नेपाल का दावा है कि ब्रिटिश काल में 1816 में भारत और नेपाल के बीच हुई सुगौली संधि के अनुसार, लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर नेपाल को संप्रभुता का अधिकार है।


जब भारत ने इस क्षेत्र में मानसरोवर लिंक रोड का उद्घाटन किया, तब नेपाल ने इसका विरोध किया। नेपाल का कहना है कि यह क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। 2020 में नेपाल ने एक नया नक्शा जारी किया, जिस पर भारत ने आपत्ति जताई।


नेपाल का तर्क है कि यदि यह भूमि नेपाल की है, तो भारत बिना सहमति के निर्माण या किसी गतिविधि की अनुमति कैसे दे सकता है। यह निर्माण अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। दोनों देशों के बीच यह सीमा विवाद दशकों से चला आ रहा है।


कैलाश मानसरोवर यात्रा का कार्यक्रम

कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त तक आयोजित की जाएगी। इस यात्रा में कुल 20 बैच शामिल होंगे, प्रत्येक बैच में लगभग 50 तीर्थयात्री होंगे। 10 बैच लिपुलेख दर्रे से और 10 बैच सिक्किम के नाथू ला दर्रे से यात्रा करेंगे। यह यात्रा 2025 में 5 साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुई थी। गलवान विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों में खटास आई थी, जिसका असर यात्रा पर पड़ा।


लिपुलेख दर्रा

नेपाल की लिपुलेख दर्रे पर आपत्ति, भारत ने खारिज किया दावा
लिपुलेख दर्रा। Photo Credit: PTI