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नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई जांच आयोग का गठन

नेपाल की नई बालेन शाह सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई जांच आयोग का गठन किया है। यह आयोग 2005 से 2025 तक के उच्च पदस्थ अधिकारियों की संपत्तियों की जांच करेगा। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस करेंगे, और इसमें अन्य प्रमुख सदस्य भी शामिल हैं। बालेन शाह ने भ्रष्टाचार समाप्त करने का वादा किया था, और यह कदम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जानें इस आयोग की कार्यप्रणाली और नेपाल में पारदर्शिता के मुद्दे पर क्या कहा गया है।
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नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई जांच आयोग का गठन

नेपाल की नई सरकार का कदम

नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई जांच प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। बालेन शाह ने एक आयोग का गठन किया है, जिसका उद्देश्य देश के सार्वजनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों, नेताओं और उच्च पदस्थ सरकारी कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच करना है.


जांच की समय सीमा

बालेन शाह ने इस जांच के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की है। यह जांच 2005-2006 से लेकर 2025-26 तक उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ होगी, जो उच्च पदों पर रहे हैं। यह निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें मंत्रियों ने जानकारी साझा की।


आयोग के सदस्य

नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल के अनुसार, इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजेन्द्र कुमार भण्डारी करेंगे। आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिनमें पूर्व जस्टिस चंडी राज ढकाल, पुरुषोत्तम पराजुली, नेपाल पुलिस के पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लाम्साल शामिल हैं.


आयोग की कार्यप्रणाली

आयोग का ध्यान पूर्व प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विधायक और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों पर केंद्रित होगा। उनकी संपत्तियों से संबंधित विवरणों की जांच की जाएगी, और यदि कोई दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.


बालेन शाह का वादा

बालेन शाह ने सत्ता में आने से पहले जनता से यह वादा किया था कि वे नेपाल से भ्रष्टाचार को समाप्त करेंगे और दोषी अधिकारियों तथा मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। 27 मार्च को कैबिनेट ने 15 दिनों के भीतर एक तंत्र बनाने का निर्णय लिया था, जिसे अब लागू किया गया है.


नेपाल में पारदर्शिता का मुद्दा

नेपाल में संपत्ति की पारदर्शिता एक लंबे समय से विवादास्पद विषय रहा है। अक्सर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और बेहिसाब संपत्ति के आरोप लगते रहते हैं। सरकार का कहना है कि यह आयोग भ्रष्टाचार को रोकने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है.