पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव: अमेरिका और इज़राइल का ईरान पर हमला
पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ
सोमवार, 2 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया से आई खबरें बेहद चिंताजनक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सेनाओं ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को नष्ट करने के लिए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को तेज कर दिया है।
ईरान पर हमले और ट्रंप की बातचीत की पेशकश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, अमेरिका और इज़राइल ने रविवार को ईरान में कई स्थानों पर हमले किए, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर बमबारी और युद्धपोतों को नष्ट करना शामिल था। इस बीच, ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "वे बात करना चाहते हैं, मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है।"
हमलों का प्रभाव और ईरान की प्रतिक्रिया
हालांकि, ट्रंप ने ईरान के नागरिकों से अपनी सरकार को अपने हाथ में लेने का आह्वान किया था। ईरानी नेताओं के अनुसार, इन हमलों के परिणामस्वरूप खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं सहित 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल और अरब देशों पर मिसाइलें दागी हैं। इज़राइल की रक्षा सेवाओं के अनुसार, यरुशलम और बेत शेमेश में हमले हुए, जिसमें नौ लोग मारे गए और 28 घायल हुए।
संघर्ष की बढ़ती जटिलता
पुलिस ने बताया कि हमले के बाद 11 लोग लापता हैं। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संघर्ष और भी व्यापक हो सकता है। अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि ईरान पर हमलों के दौरान तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हुए।
ट्रंप का बदला लेने का संकल्प
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों की मौत का बदला लेगा। इज़राइल के ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने बताया कि 100 लड़ाकू विमानों ने एक साथ तेहरान में कई ठिकानों पर हमला किया। इन हमलों में ईरान की वायुसेना की इमारतों और मिसाइल कमान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
यूरोप का रुख
यूरोप अब तक इस संघर्ष से दूर रहा है, लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि वे ईरान के हमलों को रोकने में अमेरिका का समर्थन करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति देगा।
