पश्चिम एशिया संकट: समुद्री सुरक्षा और कानूनों का पालन आवश्यक
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को स्वतंत्रता से जाने दिया जाए
पश्चिम एशिया संकट (नई दिल्ली): होर्मुज जलडमरूमध्य का बार-बार बाधित होना वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। यह समुद्री मार्ग व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लगातार बाधित होने से कई देशों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, और भविष्य में यह समस्या और बढ़ सकती है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ऊर्जा और उर्वरक संकट पर भारत का दृष्टिकोण साझा करते हुए यह बात कही। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधाओं पर चिंता व्यक्त की। हरीश ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने और नागरिक चालक दल को खतरे में डालने को अस्वीकार्य बताया। भारत ने सुरक्षित समुद्री मार्गों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर जोर दिया।
यूएन में ऊर्जा और आपूर्ति की सुरक्षा पर चर्चा
पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष बैठक में भाग लिया, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अल्पकालिक और संरचनात्मक उपायों की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हरीश ने 'एक्स' पर लिखा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का केंद्र होर्मुज
वर्तमान में, अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का एक बड़ा केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ईरान ने यहां शिपिंग नियंत्रण के लिए नया प्रस्ताव भी पेश किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि कुछ समुद्री रास्तों को सीमित किया जा सकता है, जबकि ईरान के साथ सहयोग करने वाले व्यावसायिक जहाजों को नियंत्रित तरीके से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
दोनों देशों के बीच स्थिति नाजुक
हालांकि पिछले महीने युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को मजबूत किया है। ट्रंप के नए बयान और सैन्य कार्रवाई की अटकलों ने पश्चिम एशिया में एक बड़े टकराव की आशंका को फिर से बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, ईरान भी अपने रुख पर कायम है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की ओर से बातचीत शुरू करने के संकेत मिले हैं, लेकिन तेहरान को अभी भी वॉशिंगटन की नीयत पर भरोसा नहीं है। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान की 14 सूत्रीय शांति योजना के अलावा कोई भी प्रस्ताव बेनतीजा साबित होगा।
