पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव: क्या है डूरंड लाइन का विवाद?
पाकिस्तान के हवाई हमले और तालिबान की प्रतिक्रिया
22 फरवरी की रात को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। इस पर अफगान तालिबान प्रशासन ने कड़ी आपत्ति जताई है। तालिबान का कहना है कि यह उनके देश की संप्रभुता का उल्लंघन है। इन हमलों के बाद सीमा पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। अफगान अधिकारियों ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया है, जिसके बाद तालिबान ने जवाबी कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी।
तालिबान की जवाबी कार्रवाई का कारण
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पाक चौकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की गई है। तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान लगातार सीमा का उल्लंघन कर रहा था, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा। अफगान प्रशासन इसे आत्मरक्षा का अधिकार मानता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
डूरंड लाइन का विवाद: एक पुराना मुद्दा
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन दशकों से विवाद का विषय रही है। अफगानिस्तान इस सीमा को मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। यह विवाद अक्सर झड़पों और तनाव का कारण बनता है। हाल के महीनों में सीमा पार गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं, और अब हवाई हमलों के बाद यह विवाद और भी स्पष्ट हो गया है।
सीमा पर आम लोगों की स्थिति
सीमा से सटे गांवों में रहने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवार सुरक्षा कारणों से अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। स्कूल और बाजार बंद होने की खबरें भी आई हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, और राहत एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। नागरिकों को डर है कि संघर्ष लंबा खिंच सकता है, जिससे मानवीय संकट गहरा सकता है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने अभी तक बड़े पैमाने पर ऑपरेशन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सुरक्षा सूत्रों ने सीमा पर सतर्कता बढ़ाने की बात कही है। पाकिस्तान का कहना है कि उसने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसे अफगानिस्तान ने खारिज कर दिया। दोनों देशों के दावों में भिन्नता है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष दक्षिण एशिया की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां बड़े टकराव का संकेत देती हैं। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो हालात युद्ध जैसे हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील की है, और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भविष्य में संभावित घटनाक्रम
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत महत्वपूर्ण होगी। यदि बातचीत सफल नहीं हुई, तो संघर्ष और बढ़ सकता है। दोनों देशों के लिए स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सीमा पर छोटी घटना भी बड़े संकट में बदल सकती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव शांति की दिशा में मदद कर सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें सीमा पर हो रही गतिविधियों पर हैं।
