पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव: हवाई हमले और संघर्ष की नई लहर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की स्थिति
दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालात अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गए हैं। शुक्रवार की सुबह पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत अन्य प्रांतों पर जोरदार हवाई हमले किए। यह कार्रवाई अफगानिस्तान द्वारा गुरुवार रात को पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर किए गए हमले के जवाब में की गई। इस ताजा हिंसा ने कतर की मध्यस्थता से स्थापित नाजुक युद्धविराम को लगभग समाप्त कर दिया है।
हवाई हमलों की जानकारी
काबुल में कम से कम तीन विस्फोटों की आवाज सुनाई दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ये हमले कहां हुए और क्या इनमें कोई हताहत हुआ। सरकारी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बताया कि पाकिस्तान ने कंधार और पकतिया प्रांतों में भी हवाई हमले किए।
अफगानिस्तान ने कहा कि उसकी सेना ने सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में बृहस्पतिवार रात को पाकिस्तान में हमला किया और दावा किया कि उसने पाकिस्तान की 12 से अधिक चौकियों पर कब्जा कर लिया।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की सरकार ने अफगानिस्तान के हमले को बिना उकसावे का आक्रमण बताया और यह दावा किया कि उसकी सैन्य चौकियों पर कब्जा नहीं किया गया।
पाकिस्तान ने रविवार को किए गए हवाई हमलों को क्षेत्र में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई बताया। मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के बार-बार हमलों के जवाब में डूरंड रेखा के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सीमा पार झड़पों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि महासचिव ने दोनों पक्षों से कूटनीति के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने की अपील की है।
दोनों देशों ने हताहतों के आंकड़े अलग-अलग दिए हैं। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए हैं।
पिछले तनाव और शांति वार्ताएं
पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अक्टूबर में सीमा पर झड़पों में सैनिकों, नागरिकों और संदिग्ध आतंकियों की मौत हुई थी। हालांकि, कतर की मध्यस्थता से स्थापित युद्धविराम काफी हद तक लागू रहा, लेकिन सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं होती रहीं।
नवंबर में हुई शांति वार्ताएं भी किसी औपचारिक समझौते पर नहीं पहुंच सकीं। पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में बढ़ती चरमपंथी हिंसा के लिए तहरीक-ए-पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूच अलगाववादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है।
