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पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच राजनयिक संबंधों की संभावना से क्षेत्रीय राजनीति में हलचल

पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच राजनयिक संबंधों की संभावनाओं ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में आर्मेनिया के साथ संबंध स्थापित करने के संकेत दिए हैं। यह विकास उस समय हुआ है जब आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच एक शांति समझौता हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह नया रुख तुर्की के प्रभाव का परिणाम है। भारत को भी इस नए समीकरण का सामना करने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ेगा। जानें इस विषय पर और क्या हो सकता है।
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पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच संभावित संबंध

बांग्लादेश के बाद, अब भारत के पड़ोसी देश आर्मेनिया और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों की संभावनाओं ने क्षेत्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। पहले पाकिस्तान ने आर्मेनिया को राजनयिक मान्यता नहीं दी थी, लेकिन अब दोनों देशों के बीच औपचारिक संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
यह विकास उस समय हुआ है जब हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में आर्मेनिया और अजरबैजान ने एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान ने इस कदम का स्वागत किया है। इशाक डार ने शुक्रवार को आर्मेनिया के विदेश मंत्री अररात मिरजोयान से फोन पर बात करते हुए इस 'ऐतिहासिक शांति समझौते' की सराहना की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि दोनों देश इस्लामाबाद और येरेवान के बीच मित्रवत कूटनीतिक संबंध स्थापित करने पर सहमत हैं।
दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की उम्मीद जताई है। पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच दोस्ती को भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले पाकिस्तान मुख्य रूप से तुर्की के साथ मिलकर अजरबैजान का समर्थन करता था। अजरबैजान ने मिडिल एशिया के नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र पर कब्जा पाने में बड़ी जीत हासिल की थी, जिसमें पाकिस्तान ने भारी हथियार और जेएफ-17 फाइटर जेट भी सप्लाई किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह नया रुख तुर्की के प्रभाव का परिणाम है, जिसने हाल ही में आर्मेनिया के साथ अपने संबंधों में सुधार किया है। दूसरी ओर, आर्मेनिया को भारत का समर्थन प्राप्त है, जिसने उसे बड़े पैमाने पर हथियार, रडार सिस्टम और आधुनिक तोपखाना प्रदान किया है।
भारत ने आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम और उच्च तकनीक वाले रडार की आपूर्ति करके अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत किया है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह आर्मेनिया को अपने प्रभाव में लाकर भारत के इस गठबंधन को कमजोर करे। इससे पाकिस्तान का क्षेत्रीय दबदबा बढ़ेगा, और भारत को अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ेगा।
इस नए राजनीतिक समीकरण में भारत के लिए ईरान की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, जो इस शांति समझौते से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। काकेसस क्षेत्र में अमेरिकी सेना की उपस्थिति ईरान और रूस दोनों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इस परिदृश्य में पाकिस्तान को मिडिल कॉरिडोर तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है, जो यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। भारत भी इसी मार्ग का उपयोग करता है, इसलिए इस क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना दोनों देशों के लिए आवश्यक होगा।
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच स्थापित होने वाले संबंधों से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की राजनयिक तथा सुरक्षा स्थिति किस दिशा में जाती है। भारत को भी अपनी रणनीतियों में बदलाव लाकर इस नए समीकरण का सामना करना पड़ेगा।