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पाकिस्तान का तेल संकट: मंत्री ने स्वीकार की देश की कमजोर स्थिति

पाकिस्तान वर्तमान में गंभीर तेल संकट का सामना कर रहा है, जिसके लिए पेट्रोलियम मंत्री ने देश की कमजोर स्थिति को स्वीकार किया है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। मंत्री ने बताया कि पाकिस्तान के पास कोई रणनीतिक तेल भंडार नहीं है और केवल वाणिज्यिक भंडार पर निर्भर है। इस संकट के कारण देश में ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे लोगों को घर से काम करने की सलाह दी जा रही है। वहीं, भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है।
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पाकिस्तान का तेल संकट: मंत्री ने स्वीकार की देश की कमजोर स्थिति

पाकिस्तान में तेल संकट की गंभीरता


नई दिल्ली: पाकिस्तान वर्तमान में एक गंभीर तेल संकट का सामना कर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिसका सबसे अधिक असर पाकिस्तान पर देखा जा रहा है। इस संकट को लेकर पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने खुद देश की स्थिति को स्वीकार किया है।


पेट्रोलियम मंत्री का बयान

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा, "हम भारत की तरह नहीं हैं। हमारे पास कोई रणनीतिक तेल भंडार नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान केवल वाणिज्यिक भंडार पर निर्भर है।


रिफाइनरियों के पास केवल 5 से 7 दिन का कच्चा तेल बचा है, जबकि भारत के पास 60 से 70 दिन का रणनीतिक भंडार है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपयोग किया जा सकता है।


रिजर्व की कमी

जब मंत्री से पूछा गया कि पाकिस्तान के पास कितना तेल स्टॉक है, तो उन्होंने उत्तर दिया, "हमारे पास कोई रिजर्व नहीं है। हम रोजाना तेल खरीदकर काम चला रहे हैं।"


मंत्री ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि IMF के दबाव के कारण पाकिस्तान के पास आर्थिक लचीलापन नहीं बचा है। जबकि भारत के पास 600 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे वह अपनी जरूरतों के अनुसार टैक्स में बदलाव कर सकता है।


पाकिस्तान में संकट की गहराई

तेल की कीमतों में वृद्धि ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है। देश में ऊर्जा संकट इतना गंभीर हो गया है कि लोगों को घर से काम करने की सलाह दी जा रही है। सरकारी अधिकारियों के वेतन में कटौती की गई है और पेट्रोल-डीजल भरवाने पर भी पाबंदी लगाई गई थी।


हाल ही में, पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की कमी की है, लेकिन इसका बोझ सरकार की पेट्रोलियम लेवी पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है और तेल का कर्ज तेजी से बढ़ रहा है।


भारत की स्थिति

वहीं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके आम जनता को महंगाई से राहत दी है। इसके अलावा, भारत ने रूस जैसे देशों से सस्ता तेल खरीदकर अपनी आपूर्ति को मजबूत रखा है।