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पाकिस्तान का लाहौर में नाम बदलने का फैसला: कट्टरपंथियों के विरोध के चलते पलटा प्रशासन

पाकिस्तान ने लाहौर में कुछ सड़कों और चौकों के पुराने नामों को बहाल करने की योजना बनाई थी, लेकिन कट्टरपंथियों के विरोध के चलते प्रशासन ने अपने फैसले को पलट दिया है। इस निर्णय के पीछे की वजहें और प्रशासन की चिंताएं जानें। क्या यह कदम लाहौर की ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित करेगा? पढ़ें पूरी कहानी।
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पाकिस्तान का लाहौर में नाम बदलने का फैसला: कट्टरपंथियों के विरोध के चलते पलटा प्रशासन

लाहौर में नाम बदलने की योजना पर संकट


नई दिल्ली: पाकिस्तान ने हाल ही में लाहौर की कुछ सड़कों और चौकों के पुराने नामों को पुनर्स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी, जिससे काफी चर्चा हुई। प्रशासन ने कहा था कि इस्लामपुरा क्षेत्र को फिर से 'कृष्ण नगर' नाम दिया जाएगा। इसी तरह, बाबरी मस्जिद चौक को 'जैन मंदिर चौक', सुन्नत नगर को 'संत नगर' और मुस्तफाबाद को 'धर्मपुरा' में बदलने का प्रस्ताव था। लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि लाहौर में कोई नाम परिवर्तन नहीं होगा।


कट्टरपंथियों के विरोध के चलते सरकार ने लिया यू-टर्न

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 26 मई 2026 को एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब सरकार ने लाहौर की सड़कों और गलियों के ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की योजना को स्थगित कर दिया है। सरकार कट्टरपंथी तत्वों के विरोध से बचने की कोशिश कर रही है।


इससे पहले, लाहौर हेरिटेज एरियाज़ रिवाइवल (LAHR) की बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दी गई थी, जिसकी अध्यक्षता PML-N प्रमुख नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 20 मार्च को इस संबंध में एक प्रेस नोट जारी किया था।


लाहौर प्रशासन का पलटा हुआ फैसला

हालांकि, अब लाहौर प्रशासन ने अपने फैसले से पीछे हटने का निर्णय लिया है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन आर. मुहम्मद अली एजाज ने कहा, "अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह मामला अभी विचाराधीन है।" जब उनसे पूछा गया कि नवाज शरीफ और मरियम नवाज ने तो मंजूरी दे दी थी, तो उन्होंने दोहराया कि कोई निर्णय नहीं हुआ है।


सरकार धार्मिक विवाद से बचने की कोशिश कर रही है

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों और व्लॉगर्स ने बंटवारे से पहले के 'हिंदू और सिख' नामों को बहाल करने पर मरियम नवाज की कड़ी आलोचना की। आलोचकों ने इस निर्णय को धार्मिक रंग दे दिया। इसके परिणामस्वरूप, मरियम नवाज का प्रशासन विरोध से बचने के लिए योजना को स्थगित करने पर मजबूर हो गया।


विद्वानों से सुझाव मांगे गए, फिर भी निर्णय टला

विरोध के बाद, LHAR ने विद्वानों, इतिहासकारों, आर्किटेक्टों और शहरी योजनाकारों की एक बैठक बुलाई। इसमें लाहौर की सड़कों और मोहल्लों के मूल नामों को बहाल करने के 'प्रस्ताव' पर सुझाव मांगे गए। बैठक में कहा गया कि यह लाहौर की समृद्ध विरासत और पहचान को बचाने का एक प्रयास है। अधिकांश लोगों ने ऐतिहासिक नामों को बहाल करने का समर्थन किया। LHAR ने माना कि लाहौर की ऐतिहासिक पहचान एक अनमोल विरासत है, जिसे संरक्षित करना आवश्यक है। फिर भी, सरकार ने इस निर्णय को लागू नहीं किया।