पाकिस्तान की ईरानी जासूसी विमानों को पनाह देने की सच्चाई उजागर
पाकिस्तान का डबल गेम
पाकिस्तान, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने का दावा कर रहा था, अब एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गया है। हाल ही में आई रिपोर्टों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने ईरान के जासूसी विमानों को अपने नूरखान एयरबेस पर छिपाने की अनुमति दी थी। इस मामले पर अमेरिकी सांसद लिंसे ग्राहम ने टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि यह सच है, तो अमेरिका को पाकिस्तान की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ सैन्य विमानों, जिनमें RC130 जासूसी विमान भी शामिल है, को पाकिस्तान के एयरबेस पर तैनात किया था। यह कदम अमेरिकी हवाई हमलों से अपने विमानों की सुरक्षा के लिए उठाया गया था।
ट्रंप के करीबी सांसद का बयान
लिंसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ नेताओं के पूर्व बयानों को देखते हुए, उन्हें इस रिपोर्ट की सत्यता पर कोई आश्चर्य नहीं होगा।
पाकिस्तान ने पिछले कुछ महीनों में खुद को एक शांति दूत के रूप में प्रस्तुत किया है, जबकि उसने अमेरिका और ईरान के बीच एक बैठक भी आयोजित की थी, जो बेनतीजा रही। इस दौरान, पाकिस्तान ने अपनी छवि को सुधारने का प्रयास किया।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया है, यह कहते हुए कि नूरखान एयरबेस शहर के बीचोंबीच स्थित है और वहां बड़े सैन्य विमानों को छिपाना संभव नहीं है। हालांकि, यह सवाल उठता है कि यदि सब कुछ गलत है, तो अमेरिकी अधिकारियों को इतनी गंभीर जानकारी मीडिया तक कैसे पहुंची।
इस मामले में चीन का नाम भी सामने आया है, क्योंकि पाकिस्तान की सेना वर्तमान में चीनी हथियारों और तकनीक पर निर्भर है।
