पाकिस्तान की नई रणनीति: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच मध्यस्थता और व्यापारिक सहयोग
पाकिस्तान की भूमिका पर बढ़ती नजरें
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते पाकिस्तान की भूमिका अचानक से चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर, वह खुद को दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने वाला मध्यस्थ बता रहा है, जबकि दूसरी ओर, ऐसे कदम उठा रहा है जो अमेरिकी रणनीति को कमजोर कर सकते हैं। इस स्थिति में पाकिस्तान की नीति दोहरी नजर आ रही है - एक तरफ बातचीत में सहयोग और दूसरी तरफ जमीन पर अलग खेल।
पाकिस्तान का नया कदम क्या है?
पाकिस्तान ने "ट्रांजिट ऑफ गुड्स थ्रू टेरिटरी ऑफ पाकिस्तान ऑर्डर 2026" नामक एक नया फ्रेमवर्क लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत, दूसरे देशों का सामान पहले पाकिस्तान आएगा और फिर वहां से जमीन के रास्ते ईरान भेजा जाएगा। इससे समुद्री नाकेबंदी का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंध और बढ़ता दबाव
इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" के तहत 14 व्यक्तियों और संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। यह अभियान लगभग 60 दिनों का है, जिसका उद्देश्य ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से काटना है। हालांकि, पाकिस्तान के नए ट्रांजिट सिस्टम से इन प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो सकता है।
वार्ता में रुकावट और बदलते संकेत
अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर बातचीत का दूसरा दौर प्रस्तावित था, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद जाना था। लेकिन यह यात्रा अचानक रद्द कर दी गई। ट्रंप ने इसका कारण ईरान के भीतर चल रही "आंतरिक अस्थिरता और भ्रम" बताया। उसी दिन पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने SRO 691(I)/2026 जारी किया, जिसमें नए ट्रांजिट कॉरिडोर की जानकारी दी गई।
ईरान को कैसे मिल रही राहत?
कराची बंदरगाह पर लगभग 3,000 कंटेनर फंसे हुए थे, जो ईरान जाने वाले थे। अमेरिकी दबाव के कारण ये कंटेनर आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। लेकिन अब नए जमीनी रास्तों के खुलने से इन सामानों को आसानी से ईरान भेजा जा सकेगा। इससे ईरान को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस मामले में चालाकी से काम कर रहा है। वह एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है, तो दूसरी ओर ऐसे रास्ते खोल रहा है जो ईरान को आर्थिक राहत देते हैं।
पाकिस्तान की दोहरी रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान शायद अकेला ऐसा देश है जो एक साथ कई भूमिकाएं निभा रहा है - मध्यस्थ, सहयोगी और रणनीतिक खिलाड़ी। वह सऊदी अरब जैसे देशों से आर्थिक सहयोग भी ले रहा है और ईरान के साथ व्यापारिक संबंध भी मजबूत कर रहा है।
छह नए ट्रांजिट कॉरिडोर
पाकिस्तान ने ईरान के साथ व्यापार को आसान बनाने के लिए छह प्रमुख मार्ग तय किए हैं:
1. ग्वादर से गब्द (पाकिस्तान-ईरान सीमा)
2. कराची/पोर्ट कासिम से लियारी, ओरमारा, पसनी होते हुए गब्द
3. कराची/पोर्ट कासिम से खुजदार, दलबंदीन होते हुए ताफ्तान
4. ग्वादर से तुर्बत, होशाब, पंजगुर, नाग, बेसिमा, खुजदार, क्वेटा, दलबंदीन, नोकुंडी होते हुए ताफ्तान
5. ग्वादर से लियारी, खुजदार, क्वेटा, दलबंदीन, नोकुंडी होते हुए ताफ्तान
6. कराची/पोर्ट कासिम से ग्वादर होते हुए गब्द
