पाकिस्तान की मध्यस्थता: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद में संभावित वार्ता की चर्चा हो रही है। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह किसी भी पक्ष का मोहरा बनने के लिए तैयार नहीं है। जानिए इस स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका और भारत की प्रतिक्रिया क्या है।
| Mar 25, 2026, 10:55 IST
पाकिस्तान की मध्यस्थता की पहल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक नया मोड़ सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश किया है और इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना है। इस स्थिति में यह जानना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का क्या महत्व है और भारत का इस पर क्या दृष्टिकोण है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ युद्ध में सीज फायर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह प्रस्ताव मात्र 48 घंटे में टूट गया। विशेषज्ञ इसे ट्रंप और नेतन्याहू की रणनीति का हिस्सा मानते हैं। अब इसे पाकिस्तान में शांति वार्ता के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। इजराइली पत्रकार बराक रेविड ने एक इजराइली अधिकारी के हवाले से बताया है कि इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे डी वेंस कर सकते हैं। उनके साथ शांति मिशन के लिए विशेष दूत स्टीव बिटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे, जो ट्रंप के करीबी सहयोगी हैं। वहीं, ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। इस संदर्भ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशियान से बातचीत की और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद का आश्वासन दिया। अमेरिकी विशेषज्ञ माइकल कुगलमैन का कहना है कि पाकिस्तान का इस तरह मध्यस्थता करना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पिछले एक साल में पाकिस्तान और ईरान के संबंधों में काफी सुधार हुआ है।
पाकिस्तान की मेजबानी की तैयारी
मेजबानी को लेकर पाकिस्तान तैयार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए सार्थक वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है। यह घोषणा उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें कहा गया है कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। शरीफ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए संवाद प्रयासों का स्वागत करता है और उनका समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है। कुछ घंटों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शरीफ की पोस्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। इससे पहले, विदेश कार्यालय ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अटकलों से बचने और वार्ता स्थल के बारे में आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करने का आग्रह किया था। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष के समाधान के लिए राजनयिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध है।
भारत की स्थिति
भारत में क्यों नहीं हुई मध्यस्थता
भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है। भारत चाहता है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे, लेकिन वह किसी भी स्थिति में पाकिस्तान की तरह किसी पक्ष का मोहरा बनने के लिए तैयार नहीं है। भारत की मित्रता ईरान और इजराइल दोनों के साथ है, जो उसकी संतुलित विदेश नीति का परिचायक है। कुल मिलाकर, यह राजनीतिक खेल एक दिलचस्प मोड़ पर है। अब देखना यह है कि पाकिस्तान इस अवसर का कैसे उपयोग करता है और क्या यह प्रयास वास्तव में क्षेत्र में शांति ला पाएगा या यह केवल एक और राजनीतिक चाल साबित होगा।
युद्ध का चौथा सप्ताह
चार सप्ताह से चला आ रहा युद्ध
युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करते हुए, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस्लामाबाद को वार्ता के संभावित स्थल के रूप में बताया है। ब्रिटेन के ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और मध्यस्थता की भूमिका निभाने का अनुरोध किया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा की थी कि अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के साथ सार्थक बातचीत की है। ‘सीएनएन’ के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को 15 मांगों की एक सूची भेजी है, जिसमें पाकिस्तान के माध्यम से अपनी अपेक्षाओं का ब्यौरा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक उन अधिकारियों में शामिल हैं जो अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के संपर्क में हैं।
